देशभर में हर्षोल्लास से मनाया गया दशहरा

राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल, उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी, प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और कांग्रेस महासचिव राहुल गांधी मध्य दिल्ली के रामलीला मैदान में आयोजित दशहरा उत्सव में शामिल हुए। उन्होंने बुराई पर अच्छाई की जीत के प्रतीकस्वरूप रावण, मेघनाद और कुंभकर्ण के पुतले को जलते हुए देखा।
पुतला दहन समारोह आतिशबाजी के साथ शुरू हुआ। प्रधानमंत्री व कांग्रेस अध्यक्ष ने पहले लोगों को दशहरा की बधाई दी और कामना की कि यह त्योहार देश में शांति, समृद्धि और प्रगति लाएगा।
दुर्गा पूजा का समापन
पश्चिम बंगाल में भक्ति और उत्साहपूर्वक दुर्गा पूजा मनाने के बाद विजया दशमी के दिन भक्तों ने तालाबों एवं नदियों में देवी की मूर्तियों का विसर्जन किया। इस दौरान कोलकाता में गंगा और अन्य नदियों का नजारा अत्यंत मनोहारी था। देवी और उनकी चार संततियों लक्ष्मी, सरस्वती, गणेश और कार्तिक की मूर्तियों के विसर्जन के लिए श्रद्धालु नदी तट पर जुलूस के साथ पहुंचे। मूर्ति विसर्जन के साथ ही भक्तों ने देवी को अगले वर्ष फिर से आने का न्योता दिया।
मध्य कोलकाता स्थित गंगा नदी में बना लोकप्रिय बाबूघाट श्रद्धालुओं की बड़ी संख्या में मौजूदगी के कारण आकर्षण का केंद्र रहा। मनोहारी दृश्यों के प्रत्येक क्षण को अपने परिष्कृत एसएलआर कैमरे में कैद कर रहे विदेशी पर्यटक विलियम ब्राउन ने बताया, "यह अद्भुत अनुभव है। सचमुच सुंदर और शानदार है। जब अपने घर लौटकर मैं वहां के लोगों को ये दृश्य दिखाऊंगा तो वे मेरी खूब सराहना करेंगे।"
मान्यता है कि मूर्ति का विसर्जन देवी के अपने माता-पिता के घर थोड़े दिन के निवास का प्रतीक है। इसके बाद देवी अपने पति भगवान शिव के पास कैलाश पर्वत पर चली जाती हैं। पुलिस ने बताया कि नदी के तटों पर सुरक्षा के कड़े प्रबंध किए गए थे। आपातकालीन स्थिति से निपटने के लिए नावों को तैयार रखा गया था।
सुबह के समय शादीशुदा महिलाओं ने देवी और उनके पुत्रों पर सिंदूर छिड़का और उन्हें मिठाइयां भेंट कर अपने परिवार और पति की खुशी के लिए प्रार्थना की। उधर, मिठाई की दुकानों पर लोगों की काफी भीड़ देखी गई। लोगों ने एक-दूसरे को 'शुभो विजया' की बधाई दी।
एमपी, यूपी में भी धूम
मध्य प्रदेश में गली, चौराहों से लेकर मैदानों में आयोजित समारोहों के जरिए रावण के पुतलों का दहन किया गया। वहीं दूसरी ओर देवी प्रतिमाओं के विसर्जन का दौर चलता रहा।
नवरात्र के बाद रविवार को हर तरफ देवी प्रतिमाओं का पूरे विधि विधान के साथ विसर्जन किया गया। श्रद्घालुओं ने अपने सुखमय जीवन की कामना के साथ देवी माता को विदाई दी। जहां दिन भर प्रतिमाओं को विदाई देने का क्रम चला वहीं रात को हर तरफ अन्याय व अत्याचार के प्रतीक रावण, मेघनाथ व कुंभकरण के पुतलों का दहन किया गया।
राजधानी भोपाल से लेकर इंदौर, जबलपुर, ग्वालियर के अलावा पूरे प्रांत में राम-रावण का युद्घ हुआ और रावण के पुतलों को फूंका गया। इस मौके पर भव्य चल समारोह भी निकले।
इसके अलावा जबलपुर व इंदौर में बंगाली महिलाओं ने देवी प्रतिमाओं की विदाई के मौके पर सिंदूर की होली खेली और एक दूसरे के गाल पर सिंदूर लगाकर सदा सुहागिन की कामना की। बंगाली समाज में परम्परा है कि देवी माता को लगाए जाने वाला सिंदूर महिलाएं एक-दूसरे को लगाती हैं।
मैसूर का भव्य दशहरा
कर्नाटक के मैसूर में 10 दिनों तक चलने वाला दशहरा पर्व का समापन सजे-धजे हाथियों की शोभायात्रा के साथ हुआ। 'जम्बो सवारी' के नाम से प्रसिद्ध इस जुलूस को देखने देशभर से हजारों लोग यहां पहुंचे।
भव्य शोभायात्रा को देखने के लिए चार किलोमीटर तक पुरुष, महिलाएं, बच्चे कतार में खड़े रहे। राजसी हाथी बलराम के ऊपर 750 किलो सोने का हौदा रखा गया था, जिसमें देवी चामुण्डेश्वरी की मूर्ति रखी गई थी। यहां यह परंपरा वर्षो से चली आ रही है।
शोभायात्रा में प्रधान हाथी बलराम के साथ अन्य 11 हाथी, घोड़े, ऊंट, रं-बिरंगी झांकियां, नाचते-गाते सांस्कृतिक दल और पुलिस बैंड का जत्था शामिल था।












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