राजस्थान में बेनज़ीर का गौरव गान

बीबीसी संवाददाता, जयपुर
सिंध से लगे सीमावर्ती क्षेत्रों के लिए बेनज़ीर एक महानायक हैं. अपने जीवन काल में बेनज़ीर भुट्टो थार के उस भू भाग में कभी नहीं आईं, मगर अब वो शहादत का गौरव गान करते सिंधी भाषा के गीतों के जरिये राजस्थान के बाड़मेर और जैसलमेर ज़िलों के गाँव-देहातों में पहुँच गई है.
पिछले कुछ समय से इलाके के सिंधी बहुल गाँवो में पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री का गुणगान करते, 'दुश्मन के सीने में तीर, बेनज़ीर, बेनज़ीर' जैसे नग़मों की धूम मची हुई है. कहीं-कहीं तो फ़ोन की रिंग टोन में भी बेनज़ीर सनाई देती हैं. भारतीय राज्य राजस्थान के ये दोनों ज़िले पाकिस्तान की सीमा से लगते हैं.
एक ही संस्कृति
सरहद के गाँव ख़लीफ़ों की बावड़ी के ख़ुदा बख़्श कहते हैं,''इन गीतो की सीडी और कैसेट थार एक्सप्रेस के माध्यम से यहाँ पहुँची हैं. लोग इन्हें बड़ी चाहत से सुनते हैं. ये सड़क चलते वाहनों में भी सुने जा सकते है. सिंधी चाहे हिन्दू हो या मुसलमान बेनज़ीर से सबका लगाव था."
बेनज़ीर भुट्टो की हत्या एक चुनावी रैली के दौरान कर दी गई थी. थार एक्सप्रेस पाकिस्तान के सिंध (खोखड़ापार) और भारतीय शहर मुनाबाओ के बीच चलती है लेकिन यहाँ यह संस्कृति की बिखरी कड़ियों को भी जोड़ती दिख रही है. राजस्थान के कुछ सरहदी इलाक़े पाकिस्तान से लगते हैं और सीमा के दोनों ओर सिंधी आबाद हैं.
ये मानते है कि मज़हबी भेद के बावजूद एक जैसे पहनावे, भाषा, खान-पान और रस्म रिवाज़ के कारण वह एक ही संस्कृति का हिस्सा हैं. सिंध से भारत आकर बसे तेज़दान देथा कहते है कि बेनज़ीर दोनों समुदाय में लोकप्रिय हैं.
महानायक बेनज़ीर
इन गीतों में उनके जीवन प्रसंगो का उल्लेख है और उन्हें एक महानायक के तौर पर पेश किया गया है. रेगिस्तान के सिंध बहुल गाँवो में इन गीतों के बोल में वृतांत है बेनज़ीर के आठ साल तक वतन से बाहर रहने की, उनकी वापसी की और उनकी हत्या की. इन गीतों को सिंध के लोकप्रिय गायक क़ासम ओटो, फोजि़या सूमरो, शमीना गुड्डी और हैदर रिंद ने आवाज़ दी है.












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