फ़ोनसेका को माफ़ी नहीं: पेइरिस

फ़ोनसेका को माफ़ी नहीं: पेइरिस

जनरल फ़ोनसेका ने राष्ट्रपति पद का चुनाव भी लड़ा था लेकिन वे हार गए थे

भारत के दौरे पर आए श्रीलंका के विदेशमंत्री जीएल पेइरिस ने तमिल विद्रोहियों के साथ लड़ाई जीतने में बड़ी भूमिका निभाने वाले श्रीलंकाई सेना के पूर्व प्रमुख सरथ फ़ोनसेका को माफ़ी दिए जाने की संभावना से इनकार किया है.

जनरल फ़ोनसेका को सैन्य अदालत ने भ्रष्टाचार का दोषी करार दिया है.

श्रीलंकाई विदेशमंत्री का कहना है कि जनरल फ़ोनसेका चाहें तो इस फ़ैसले को चुनौती दे सकते हैं.

उन्होंने कहा है कि तमिल विद्रोहियों के साथ युद्ध समाप्ति के बाद से विस्थापितों को पुनर्वास में काफ़ी तरक्की हुई है और तीन लाख में से सिर्फ़ 20 हज़ार तमिल विस्थापितों का पुनर्वास शेष है.

दिल्ली में श्रीलंका उच्चायोग के एक कार्यक्रम में जब श्रीलंका के विदेश मंत्री पत्रकारों से बात कर रहे थे तो सबसे पहले उनका ध्यान खींचा गया वहां देश की राजनीति में चले रहे एक सबसे बड़ा राजनीतिक विवाद की ओर यानी देश के पूर्व सैन्य प्रमुख जनरल सरथ फ़ोनसेका को दी गयी तीन साल जेल की सज़ा की ओर.

सेना की एक अदालत ने उन्हें हथियारों की ख़रीद में भ्रष्टाचार का दोषी पाया है.

मगर श्रीलंका में कई लोग यह भी मानते हैं कि महिंदा राजपक्षे सरकार ने राजनीतिक प्रतिशोध के तहत उन पर मामले दर्ज किए क्योंकि तमिल विद्रोहियों के ख़िलाफ़ लड़ाई में जीत के श्रेय और जनरल फोनसेका की राजनीतिक महात्वाकांक्षाओं के चलते उनके और सरकार के बीच संघर्ष शुरु हो गया था.

जनरल फ़ोनसेका ने पिछले राष्ट्रपति चुनाव में महिंदा राजपक्षे के ख़िलाफ़ चुनाव लड़ा था और हार गए थे.

श्रीलंका के विदेशमंत्री से यह पूछे जाने पर कि क्या सरकार उनके ख़िलाफ़ राजनीतिक विशाल हृदयता दिखाते हुए उन्हें माफ़ कर सकती है तो उन्होंने इससे इनकार किया.

श्रीलंका के विदेश मंत्री पेइरिस ने कहा, "सिर्फ़ इसलिए क्योंकि जनरल फ़ोनसेका पूर्व सेना प्रमुख थे उनके ख़िलाफ़ का़नून प्रक्रिया के तहत भ्रष्टाचार के आरोप सिद्ध होने के बावजूद माफ़ी देना एक बड़ी ख़तरनाक बात होगी. यह क़ानून की ज़डें खोदने समान होगा."

मगर सरथ फोनसेका और उनके समर्थकों का कहना है कि 'सभी आरोप राजनीति से प्रेरित हैं और उन्हें राष्ट्रपति को चुनौती देने की सज़ा दी जा रही है'.

श्रीलंकाई विदेशमंत्री का कहना है कि अगर जनरल फ़ोनसेका चाहें तो सैन्य अदालत के फ़ैसले के ख़िलाफ़ अपील कर सकते हैं.

तमिलों के पुनर्वास को लेकर संयुक्त राष्ट्र भी चिंता ज़ाहिर कर चुका है

श्रीलंका के विदेशमंत्री जीएल पेइरिस ने कहा कि तमिल विद्रोही संगठन एलटीटीई के ख़िलाफ़ लड़ाई में विजय प्राप्त करने के बाद महिंदा राजपक्षे की सरकार की सबसे बड़ी प्राथमिकता उत्तर पूर्वी क्षेत्रों का विकास और इस लड़ाई से विस्थापित हुए लोगों का जल्द से जल्द पुनर्वास करना है, जिसमें सरकार ने तरक्की की है.

उन्होंने कहा कि गृहयुद्ध की समाप्ति के समय विस्थापित लोगों की संख्या लगभग तीन लाख थी जो अब घट कर बीस हज़ार रह गई है और इन लोगों का पुनर्वास भी जल्द हो जाएगा.

एक और बड़ा मुद्दा था युद्ध के आख़िरी चरणों में हिरासत में लिए गये हज़ारों विद्रोहियों का. उस बारे में श्रीलंका के विदेशमंत्री जीएल पेइरिस ने कहा, "अभी दो महीने पहले हिरासत में लिए गए पूर्व तमिल लड़ाकों की संख्या 11600 के करीब थी जो अब 7200 तक रह गई है. इनमें से जिनके ख़िलाफ़ अपराध के सूबूत हैं उन्हें छोड़कर शेष को जल्द ही रिहा कर दिया जाएगा."

एक अन्य मुद्दा जो श्रीलंका में विवाद का विषय है कि क्या राष्ट्रपति महिंदा राजपक्षे लोकतंत्र की राष्ट्रपतीय शासन प्रणाली को लाने के अपने वादे पर कदम उठाएंगे.

जिसके जवाब में उन्होंने कहा कि श्रीलंका की जनता यही चाहती है और राष्ट्रपति इस दिशा मे ज़रूर प्रयास करेंगे.

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