अपने अंदर के विश्वास को समझें

नई दिल्ली, 17 अक्टूबर (आईएएनएस)। ऐसा विश्वास दु:ख आए तो पक्का करेगा और लेबल लगाएगा कि 'यह दु:ख हमेशा रहेगा, मैं हमेशा दु:खी रहूंगा' और वह रोते-धोते ही रहेगा। कुछ भी हुआ तो वह पक्का ही करता है। सुख आया तो उसे भी पक्का करता है कि 'कहीं यह सुख चला न जाए।' उसे यह नहीं पता कि पक्का करना, लेबल लगाना, चीजों को पकड़ना ही उसके दु:ख का कारण है।

इस तरह का विश्वास इंसान को बहुत दूर तक नहीं ले जाएगा, क्योंकि हर विश्वास की एक सीमा है कि 'यहां-यहां तक वह विश्वास पहुंचा सकता है, जो आपको कुछ सीमित क्षेत्र तक ही मार्गदर्शन दे सकता है। जिसमें अभी सौ प्रतिशत विश्वास प्रकट नहीं हुआ है।'

पृथ्वी पर हर इंसान यही चाहता है कि सौ प्रतिशत विश्वास प्रकट हो। अगर सभी में यह विश्वास सौ प्रतिशत हो जाय तो कितना बड़ा चमत्कार हो सकता है। कभी-कभी वह विश्वास कुछ अवस्थाओं में, तीर्थस्थानों, मंदिरों, पहाड़ों और झरनों पर प्रकट होता है। लोगों को सकारात्मक परिणाम भी मिलते हैं और वे हमेशा वहां जाना चाहते हैं मगर उन्हें यह रहस्य मालूम नहीं है कि विश्वास कैसे प्रकट होता है। अगर उन्हें यह रहस्य मालूम हो जाए तो वे घर पर बैठकर ही वह विश्वास प्रकट कर सकते हैं, उसके लिए उन्हें कहीं बाहर जाने की जरूरत नहीं है।

अब तक आपने जाना कि आपके अंदर विश्वास पहले से ही है, इसे कहीं बाहर से नहीं लाना है, सिर्फ उसे प्रकट करना है, खोलना है। हर एक की चाहत यही है कि यह विश्वास खुले, क्योंकि जब आप कहते हैं, 'मुझे मालूम था यह होगा, मुझे विश्वास था ऐसा होगा' तब आपको कितनी खुशी होती है। जब आपको यह पक्का है, मालूम ही है, विश्वास है कि आपको सफलता मिलेगी ही तब आपको कितना आनंद आएगा!

अपने अंदर का विश्वास समझें, इंतजार न करते बैठें कि ऐसा-ऐसा होगा तो मेरा विश्वास बढ़ेगा, ऐसा-ऐसा दिखेगा तो विश्वास बढ़ेगा, जब आप पर ऐसी फूलों की वर्षा होगी तब आप मानेंगे कि यह आपके साथ संभव है, नहीं, ऐसा नहीं है। यह ऐसा विश्वास है, जो आता है तो जाता नहीं। समय के साथ बल खत्म हो जाए, कुर्सी छिन जाए, मंत्र उलटा पड़ जाय तो भी देखेंगे कि जिसके पास विश्वास है, वह इंसान सदा, हर घटना में आनंदित रहता है और दूसरों के लिए आनंद का कारण बनता है। बाहर की बातों (सिद्धि, ताकत, पैसे, कुर्सी, नाम, शोहरत, पद और प्रतिष्ठा) से आया हुआ विश्वास कारण हटते ही अविश्वास में परिवर्तित हो जाता है लेकिन अंदर की समझ, अनुभव, सत्य से आया हुआ विश्वास कभी नहीं टूटता, वह तेज विश्वास होता है।

आत्मविश्वास/तेजविश्वास : हम सब को तेज विश्वास और आत्मविश्वास चाहिए। विश्व का एक भी इंसान यह नहीं चाहता कि 'मुझे विश्वास नहीं है।' सभी में विश्वास है मगर तेज विश्वास, विश्वास और अविश्वास से परे है। तेज विश्वास बाहर की चीजों पर आधारित नहीं है। जैसे लॉटरी के पैसे खत्म हो गए और पैसे खत्म होते हैं। कुर्सी छिन गयी और कुसी छीनी जाती है। नया वर्ल्ड रिकॉर्ड बनानेवाला आ गया और आता है। पुराना रिकॉर्ड टूट गया और टूटता है मगर तेज विश्वास कभी नहीं टूटता, वह अटूट है।

तेज विश्वास में अनुभव है, विश्वास में केवल विचार है। दोनों में बड़ा फर्क है। तेज विश्वास इंसान की सबसे बड़ी ताकत है। पूरे विश्व में कहीं पर भी जो चमत्कार हो रहे हैं, वे तेज विश्वास की शक्ति की वजह से हो रहे हैं इसलिए अपने अंदर के तेज विश्वास को समझें।

मनन करें :

* जिस तरह पानी अंदर और बाहर जाने के लिए एक ही पाइप होता है, उसी तरह आपके अंदर भी विश्वास जाने के लिए और बाहर आने के लिए, एक ही रास्ता है, मन।

* बल, निरीक्षण, नाम, शोहरत, पैसा और कुर्सी इन बातों की वजह से आया हुआ विश्वास अस्थायी है।

*अस्थायी विश्वास, कारण हट जाते अविश्वास में परिवर्तित होता है लेकिन समझ से आया हुआ विश्वास कभी नहीं टूटता।

* विश्व में हर इंसान के पास विश्वास है। महत्व इस बात का है कि आपका विश्वास तेज विश्वास में परिवर्तित हो जाए।

* तेज विश्वास में अनुभव होता है और विश्वास में केवल विचार होते हैं। तेज विश्वास इंसान की सबसे बड़ी ताकत है।

* विश्वास रखनेवाला बाधाओं के बावजूद भी देर सवेर अपना काम पूरा करता है और विश्वास न रखनेवाला छोटी बाधा से भी काम को रोक देता है।

(डायमंड पॉकेट बुक्स प्रा. लि. द्वारा प्रकाशित पुस्तक 'आत्मविश्वास सफलता का द्वार' से साभार)

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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