पहले खुद का आदर करें
सरश्री तेजपारखी
नई दिल्ली, 15 अक्टूबर (आईएएनएस)। इंसान जब पहले अपने आपको आदर देना सीखेगा। तब वह दूसरों को भी आदर देगा। शुरुआत में ही उसका मूल अहंकार नहीं टूटेगा। शुरू में ही कोई अपने आपको नहीं जान सकता। स्वयं के प्रति आदर है तो शुरुआत कुछ अच्छी बातों को विकसित करने से होगी कि 'मुझे अच्छी शिक्षण पद्धति लेनी चाहिए.. मुझे सही लोगों के साथ उठना-बैठना चाहिए क्योंकि मैं अपने आपको दुनिया की बेहतरीन चीजें देना चाहता हूं' मगर इसमें भी बारीकी है, क्योंकि यहां आदर के अहंकार में बदलने की संभावना है।
यदि दूसरों को आदर देते-देते सामनेवाले ने आपको चोट पहुंचाई तो उसके प्रति नफरत शुरू होने की संभावना है, तो आदर से बिल्कुल विपरीत है। यह नफरत, आपके अहंकार को चोट पहुंचने की वजह से जागेगी। इसमें यह भी धोखा है कि अब आप चिढ़कर कहेंगे, 'आदर अभी बाजू में रखो, पहले उसे सबक सिखाया जाए।'
इस तरह कब आदर अहंकार में घुल-मिल जाता है, यह आपको पता ही नहीं चलता। पहले जब कोई सुनता है कि अहंकार नहीं रखना चाहिए तो वह अपने प्रति आदर भी कम कर देता है। तब उसे कहा जाता है कि 'आदर कम मत करें, यह आगे सेल्फ रियलाइजेशन (आत्मसाक्षात्कार) में काम आएगा। आप किसी से न कम (इनफीरियर) हैं, न ज्यादा (सुपीरियर) हैं। आप जो हैं, वह हैं, उसे आदर देना शुरू करें। यह आदर देते-देते आप सत्य के करीब पहुंच जाएंगे।'
जो स्वयं का आदर करता है, वह सत्य की तरफ जाएगा। जो स्वयं का दुश्मन होगा, वह माया में ही जाएगा। वह अपने आपको खाई में लेकर जाएगा, शराब, व्यसनों में ही उलझेगा, क्योंकि उसे अपने प्रति कोई आदर ही नहीं है। अलग-अलग शब्द हैं, शब्दों के सहारे हमें समझना है मगर इनके बीच बहुत पतली रेखा (फाइन लाइन) है, इसलिए जल्दी समझ में नहीं आती। तेजज्ञान की पुस्तकों में कहा जाता है तेज स्वार्थी बनें। तेज स्वार्थी, वह जो जो स्व का अर्थ जानता है वरना स्वार्थी (अहंकारी) शब्द तो नकारात्मक शब्द है।
असली अर्थ समझाने के लिए अलग-अलग शब्द कहे जाते हैं। जिन शब्दों के अर्थ खो जाते हैं, उनकी जगह पर नए शब्द लाए जाते हैं। आज जिन शब्दों में आपको ये बातें बताई गई हैं, उनके द्वारा आपको यह समझना है कि जब तक रियलाइजेशन नहीं हुई है तब तक हर एक में अहंकार तो मूल है ही मगर अपने अंदर से इसे निकालने के लिए उसे स्वीकार करें, समझें और यह मान लें कि 'ठीक है, अहंकार है।' मानने के बाद यह समझ रखें कि 'अब मैं ऐसा कौन सा ज्ञान अंदर लूं, जो मुझे यह अहंकार तोड़ने में मदद करेगा।'
आप जानते हैं कि घृणा अहंकार को तोड़ने में मदद नहीं करेगी बल्कि आदर मदद करेगा। शरीर को जो चीजें तकलीफ दे रहीं हैं, आप उनसे दूर होते जाएंगे। जरूरत से ज्यादा नहीं खाएंगे। जो अपने प्रति आदर नहीं रखते, वे ज्यादा खा लेते हैं। वे खाने के लिए जीने लगते हैं। जीवन की कीमत सब कुछ है मगर उन्होंने जीवन की कीमत खाना लगाया। अगर वे खाने के टुकड़ों के लिए जी रहे हैं तो वे कितना नीचे गिर गए हैं। इसलिए सही ढंग से अपने आपको आदर दें, यह आत्मगौरव (सेल्फ इस्टीम) है, स्वयं का सच्चा आदर है। इस आदर से तेज सत्य के करीब पहुंचने की शुरुआत होगी।
मनन करें :
*अहंकार का मूल अर्थ है अपने आपको दूसरों से अलग मानना, महसूस करना और स्वयं को दूसरों से श्रेष्ठ सिद्ध करना।
* अगर अपको स्वयं के प्रति आदर है तो आप जल्द से जल्द सत्य जानना चाहेंगे।
* अपने अंदर से अहंकार निकालने के लिए पहले यह मानें कि आपके अंदर अहंकार है।
* अहंकार में जीने के बजाए अपने आपको आदर दें और जल्द से जल्द सत्य जानें।
* इंसान जब अपने आपको आदर देना सीखेगा तब वह दूसरों को भी आदर देगा।
(डायमंड पॉकेट बुक्स प्रा. लि. द्वारा प्रकाशित पुस्तक 'आत्मविश्वास सफलता का द्वार' से साभार)
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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