अपने भीतर झांकना बेहतर होगा
नई दिल्ली, 14 अक्टूबर (आईएएनएस)। मेरा शरीर सही ढंग से कार्य नहीं करता। दर्द, रक्त निकलना, दुखना, टपकना, मरोड़, सूजन, जलन, बुढ़ापा, देखने में परेशानी सुनने में परेशानी, शरीर सड़ रहा है और ऐसी कई परेशानियां। इसके साथ आपकी अपनी बनाई अन्य परेशानियां। मैं सोचती हूं कि मैंने यह सब सुना है।
मेरा संबंध मरे पक्ष में नहीं। उनमें घुटन है, किसी काम के नहीं हैं बहुत अपेक्षाएं रखते हैं, समर्थन नहीं देते, हमेशा आलोचना करते हैं, प्यार नहीं करते, कभी मुझे अकेला नहीं छोड़ते, हर समय मुझे कुरदते रहते हैं, मेरे साथ परेशान नहीं होना चाहते, मुझे दबाते हैं, कभी मेरी बात नहीं सुनते और भी ऐसी ही कई बातें। इसके अलावा और भी अवधारणाएं। बिलकुल, मैंने यह सब सुना है।
मेरी आर्थिक व्यवस्था सही नहीं है। आर्थिक स्थिति बेकार है, कभी-कभार ठीक होती है, काफी नहीं, मेरी पहु़ंच से बाहर, बहुत ज्यादा खर्च होता है। बिल अदा नहीं होता, पैसा हाथों से निकल जाता है और भी अन्य बातें। स्वयं आपके द्वारा उत्पन्न और भी कई बातें। निश्चित ही मैंने ये सब बातें सुनी हैं।
मेरा जीवन बेकार है। मैं जो करना चाहता हूं, वह कभी नहीं कर पाता। मैं किसी को खुाश नहीं कर पाता। मैं स्वयं नहीं जानता कि मैं क्या करना चाहता हूं। मेरे पास अपने लिए कभी समय नहीं होता। मेरी जरूरतों और इच्छाओं की पूर्ति नहीं होती। मैं केवल दूसरों को खुश करने के लिए कर रहा हूं। मैं बस एक पायदान की तरह हूं। किसी को परवाह नहीं है कि क्या करना चाहता हूं। मुझमें कोई काबिलियत नहीं है। मैं कुछ भी सही नहीं कर सकता। मैं बस टाल-मटोल करता हूं। कोई भी चीज मेरे काम नहीं आती और भी बहुत कुछ। इसके साथ जो भी आपने अपने लिए सोचा हो। मैंने ऐसा बहुत कछ सुना है।
जब भी मैं अपने नए ग्राहक से पूछती हूं कि उसके जीवन में क्या चल रहा है, तो आम तौर पर उपर्युक्त जवाबों में से कोई मिलता है, या इन जवाबों में से कोई मिलता है, या इन जवाबों में से कई। उन्हें वास्तव में लगता है कि वे समस्या को जानते हैं। लेकिन मैं जानती हूं कि ये शिकायतें केवल आंतरिक विचार-प्रारूपों के बाहरी प्रभाव हैं। आंतरिक विचार-प्रारूपों की सतह के नीचे एक और अधिक गहरा, अधिक मूलभूत प्रारूप है, जो सभी बाहरी प्रभावों का आधार है।
जब मैं कुछ मूलभूत प्रश्न पूछती हूं तो उनके द्वारा इस्तेमाल किए गए शब्दों पर ध्यान देती हूं। आपके जीवन में क्या चल रहा है? आपका स्वास्थ्य कैसा है? आप अपना निर्वाह कैसे करते हैं? क्या आपको अपना काम पसंद है? आपकी आर्थिक स्थिति कैसी है? आपका प्रणय जीवन कैसा है? पिछला रिश्ता कैसे समाप्त हुआ था? और उससे पहले का रिश्ता किस प्रकार समाप्त हुआ था? अपने बचपन के बारे में संक्षेप में बताएं।
मैं शरीर की मुद्राएं और चेहरे की भाव भंगिमाएं देखती हूं। लेकिन अंधिकांशत: मैं उनके शब्दों को सुनती हूं। विचार और शब्द हमारे भावी अनुभवों को जन्म देते हैं। जब मैं उन्हें बात करते सुनती हूं तो मैं सहजता से उनकी समस्याओं के कारण समझ जाती हूं।
हमारे शब्द अंदरूनी विचारों के बारे में बताते हैं। कभी-कभार उनके शब्द उनके अनुभवों से मेल नहीं खाते, जिनका वे वर्णन करते हैं। फिर मैं समझ जाती हूं कि या तो वे वास्तव में नहीं जानते कि क्या हो रहा है या फिर मैं समझ जाती हूं कि या तो वे वास्तव में नहीं जानते कि क्या हो रहा है या फिर वे मुझसे झूठ बोल रहे हैं। इनमें से एक शुरुआती बिंदु हैं और हमारी बात शुरू होने के लिए आधार बनते हैं।
(प्रभात प्रकाशन द्वारा प्रकाशित पुस्तक 'यू कैन हील योर लाइफ' से साभार)
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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