ऊंचे विश्वास से जीवन में चमत्कार

नई दिल्ली, 10 अक्टूबर (आईएएनएस)। अटूट विश्वास का महत्व सभी जानते हैं। आप कई बार कहते भी हैं कि 'फलां-फलां बात पर हमें विश्वास है' पर ईमानदारी से अपने आपसे पूछें कि कुछ गलत हो जाने पर भी क्या आपको वह विश्वास रहेगा?

एक इंसान ने गुरुजी से कहा, 'मुझे झट से ज्ञान दे दीजिए, मैं ज्ञान लेने के लिए तैयार हूं। मैंने सभी प्रवचन सुने हैं, मैं उससे प्रभावित भी हो गया हूं और मुझे पक्का विश्वास हो गया है कि सत्य की प्राप्ति श्रवण से ही होगी। सत्य प्राप्ति के लिए आप जो आदेश देंगे मैं मानने के लिए तैयार हूं।'

गुरुजी ने उससे पूछा, 'आप ऐसा कह तो रहे हैं पर जरा सोचकर देखें, यदि आपको कहा जाए कि 'आपकी जो फलां-फलां पुस्तक है, वह जला डालें' तो क्या आप ऐसा कर पाएंगे? यह सुनकर तो वह इंसान हिल गया। उसके बाद वह गुरुजी से मिलने दोबारा आया ही नहीं और वह कह रहा था कि 'मुझे आप पर पूरा विश्वास है, मुझे ज्ञान दें।' उसका विश्वास कैसा था? वह विश्वास तमोगुणी (सुस्त) का विश्वास था, जो लेटे-लेटे सब चाहता है।

इस उदाहरण द्वारा यह बताया गया कि जिसकी जहां आसक्ति होती है, वहां गुरुजी का प्रयास शिष्य को उस आसक्ति से बाहर निकालने का रहता है। गुरुजी की आज्ञा हर एक के लिए अलग-अलग हो सकती है। किसी को पुस्तक जलाने के लिए कहा जाता है तो किसी को पुस्तक पढ़ने के लिए कहा जाता है, क्योंकि हर एक की 'गीता' अलग है। यह मात्र उदाहरण था। जो आसक्ति इंसान के व्यक्तित्व के विकास में बाधक है, उसे खत्म करने के लिए गुरु द्वारा कुछ पंक्तियां कही जाती हैं।

विश्वास की परख : विश्वास को परखने के लिए यहां एक ऐसे इंसान का उदाहरण दिया गया है, जिसका विश्वास सिर्फ शब्दों में झलकता था। इसे एक और उदाहरण से जानें।

एक कलाबाज अलग-अलग और खतरनाक तरीके से करतब किया करता था। अपनी कला का प्रदर्शन कर वह लोगों का मनोरंजन करता और अपनी रोजी-रोटी भी कमाता था। उस कलाबाज का एक बहुत प्रिय मित्र भी था। जब वह कलाबाज कोई जोखिम भरा करतब करता, तब उसके मित्र को कई लोग जाकर यह बताते कि 'देखो तुम्हारा मित्र इतनी-इतनी ऊंचाई से रस्सी पर चलना चाहता है।'

तब कलाबाज का मित्र उन लोगों को पूरे आश्वासन के साथ कहता, 'हां-हां मुझे मालूम है, मुझे उस पर पूरा विश्वास है कि वह चल सकता है' और वाकई वह कलाबाज जब अपने करतब में कामयाब होता तब उसका मित्र बड़े गर्व से लोगों को कहता, 'देखा, मुझे मालूम ही था ऐसा हो पाएगा, मुझे उस पर पूरा विश्वास है।'

फिर कुछ समय बाद कलाबाज के मित्र के पास अगली बार खबर आती है कि 'तुम्हारा मित्र इस बार दो ऊंची बिल्डिंग के बीच में रस्सी बांधकर उस पर चलनेवाला है।' तब भी वह मित्र कहता है, 'हां, वह चल सकता है, इतनी ऊंची-ऊंची इमारतें हैं, फिर भी वह चल पाएगा।' फिर जब कलाबाज का वह करतब सफलतापूर्वक पूरा हो जाता तब वह मित्र लोगों से कहता, 'मुझे उस पर पूरा विश्वास था कि वह इतनी ऊंचाई पर बंधी रस्सी पर से चल पाएगा।' वहां पर उस मित्र का पूर्ण विश्वास है, उसे अपने कलाबाज मित्र पर जरा भी संदेह नहीं है। मगर विश्वास किस हाइट का है, कितना अटूट है, यह घटना घटते समय पता चलता है।

कुछ दिनों बाद कुछ लोग आकर कलाबाज के मित्र को बताते हैं, 'अब तुम्हारा मित्र दो पहाड़ों के बीच में रस्सी बांधकर चलनेवाला है' तब भी वह लोगों से यही कहता कि 'हां, मेरा मित्र चलनेवाला है, मुझे मालूम है।' वहां भी वह कलाबाज अपना कार्य पूरी कुशलता के साथ पूर्ण करता है।

आगे लोग उसके मित्र के पास अगली खबर यह लाते हैं कि 'इस बार तुम्हारा मित्र एक इंसान को अपनी पीठ पर बिठाकर रस्सी पर चलनेवाला है।' इस पर मित्र कहता है, 'हां, वह चल पाएगा मुझे मालूम है, मुझे पूरा विश्वास है।' उसके बाद यह खबर आती है कि डर के कारण उस कलाबाज की पीठ पर बैठने के लिए कोई तैयार ही नहीं हो रहा है।

तब कुछ लोग उस कलाबाज के मित्र से कहते हैं, 'तुम्हें तो अपने मित्र पर, उसकी कुशलता पर पूरा विश्वास है तो तुम ही उसकी पीठ पर बैठने के लिए तैयार हो जाओ, वह तुम्हें लेकर रस्सी पर चलेगा।' उस समय उसके मित्र का विश्वास डगमगा जाता है। वह कहता है, 'मैं नहीं बैठूंगा' और वहां से खिसक लेता है। यह थी विश्वास की परख।

इस तरह का विश्वास उस ऊंचाई पर नहीं है, जहां पर रूपांतरण होता है। जब पानी से भाप बनता है तब वहां रूपांतरण होता है। रूपांतरण सौ डिग्री से कम पर नहीं बनता। रूपांतरण यानी विश्वास जब ऊंचाई तक पहुंचता है, तब चमत्कार शुरू होते हैं।

हर घटना विश्वास के लिए मौका है : हर घटना आपको मौका देती है कि इस घटना में आपका विश्वास प्रकट हो रहा है कि अटका हुआ है। जो विश्वास आपके अंदर से झांक रहा है, उसे बाहर आने के लिए हर घटना एक मौका है।

जो लोग आत्मविश्वास से भरे हुए हैं, आप उन्हीं लोगों के साथ व्यवहार और व्यापार करना चाहते हैं, उन्हीं के साथ रहना चाहते हैं। आप ऐसे लोगों के साथ अपने आपको सुरक्षित महसूस करते हैं, जो विश्वास से भरे हुए होते हैं। आपको लगता है कि विश्वसनीय लोगों के साथ रहने से हम कभी दुखी नहीं होंगे तो आप अपने लिए यह सोचें कि आप कितने विश्वसनीय बने हैं, लोग आपके साथ क्यों रहना चाहेंगे?

हर एक के अंदर आप विश्वास ही देखना चाहते हैं, मगर यह भी देखें कि हमारे अंदर कितना विश्वास है। यदि घटनाओं के आधार पर आपका विश्वास हिल जाता है, घटना नकारात्मक होने से या सकारात्मक होने से आपका विश्वास हिल जाता है तो अभी आपको अपने अंदर विश्वास प्रकट करने के लिए बहुत काम करना बाकी है।

इन बिंदुओं पर मनन करें :

1. किसी भी घटना में जब आपका विश्वास नहीं हिलता तब वह अटूट विश्वास होता है।

2. गुरुजी आपकी आसक्ति तोड़ने के लिए आपको आज्ञा देते हैं ताकि आपका विश्वास, अटूट विश्वास में परिवर्तित हो।

3. जब विश्वास ऊंचाई तक पहुंचता है, तभी जीवन में चमत्कार शुरू होते हैं।

4. जो विश्वास आपके अंदर से झांक रहा है, उसे बाहर लाने के लिए हर घटना एक मौका है।

5. अगर नकारात्मक घटना में आपका विश्वास हिल जाता है तो समझिए, आपको अपने विश्वास पर अभी और काम करना है।

(डायमंड पॉकेट बुक्स प्रा. लि. द्वारा प्रकाशित पुस्तक 'आत्मविश्वास सफलता का द्वार' से साभार)

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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