हर विचार बनाता है भविष्य
नई दिल्ली, 10 अक्टूबर (आईएएनएस)। जीवन वास्तव में बहुत सरल है। जो हम देते हैं, वही हमें वापस मिलता है। जो कुछ हम अपने विषय में सोचते हैं, वह हमारे लिए सच हो जाता है। मैं मानती हूं कि हर व्यक्ति जिसमें मैं भी शामिल हूं, अपने जीवन में हर अच्छी या बुरी चीज के लिए स्वयं जिम्मेदार हैं।
हमारे मस्तिष्क में आने वाला हर विचार हमारा भविष्य बनाता है। हममें से हर व्यक्ति अपने विचारों और अपनी भावनाओं द्वारा अपने अनुभवों को जन्म देता है। हमारे विचार, जो हम बोलते हैं, वह सब हमारा अनुभव बन जाता है।
हम खुद परिस्थितियों को जन्म देते हैं और फिर अपनी कुंठा के लिए किसी दूसरे व्यक्ति को दोषी ठहराते हुए अपनी ऊर्जा नष्ट करते हैं। कोई व्यक्ति, कोई स्थान और कोई चीज हमसे अधिक शक्तिशाली नहीं है, क्योंकि अपने मस्तिष्क में केवल 'हम' ही सोचते हैं। जब हम मस्तिष्क में शांति, तालमेल और संतुलन बना लेते हैं तो यह सब हमारे जीवन में भी आ जाता है। इनमें से कौन-सा कथन आपके विचार से मिलता है?
लोग मेरे पीछे पड़े हैं। हर व्यक्ति हमेशा मेरी मदद करता है। इनमें से प्रत्येक बिलकुल भिन्न अनुभव जन्म देगा। हम अपने बारे में और जीवन के बारे में जो भी मानते हैं वह हमारे लिए सच हो जाता है।
हम जो भी सोचना या मानना चाहते हैं, हर विचार में ब्रह्मांड हमारे साथ होता है। दूसरे रूप में, हम जो भी स्वीकार करते हैं, हमारा अवचेतना मन उसे स्वीकार कर लेता है। इन दोनों का अर्थ है कि मैं अपने और जीवन के बारे में जो भी स्वीकारता हूं, वह मेरे लिए एक सच्चाई बन जाता है। आप अपने और जीवन के बारे में जो भी सोचते हैं, वह आपके लिए सच हो जाता है। हमारे पास सोचने के लिए असीमित विकल्प होते हैं।
जब हम यह जान जाते हैं तो 'लोग मेरे पीछे पड़े हैं' की अपेक्षा 'हर कोई हमेशा मेरी मदद करना चाहता है' का विकल्प चुनना सही होगा।
शाश्वत शक्ति कभी हमारा मूल्यांकन या हमारी आलोचना नहीं करती वह केवल हमारे मूल्यों पर हमें स्वीकार करती है। फिर वह हमारे विचारों को हमारे जीवन में प्रतिबिंबित करती है। यदि मैं यह मानना चाहती हूं कि मेरा जीवन बहुत एकाकी है और कोई मुझसे प्रेम नहीं करता, तो मुझे दुनिया में यही मिलेगा।
लेकिन यदि मैं उस विचार को छोड़ने के लिए तैयार हूं और अपने लिए दृढ़ता से यह कहूं कि 'प्रेम हर जगह है और मैं प्रेम करने व प्रेम पाने योग्य हूं' और इस नए विचार पर कायम रहूं तथा उसे बार-बार स्वीकार करूं तो यह मेरे लिए सच हो जाएगा। अब मुझसे प्रेम करनेवाले लोग मेरे जीवन में आएंगे, पहले से मौजूद लोग मेरे प्रति अधिक प्रेम रखेंगे और मैं दूसरों के प्रति आसानी से प्रेम की अभिव्यक्ति कर पाऊंगी।
हममें से अधिकतर लोग 'हम कौन है' के बारे में मूर्खतापूर्ण विचार रखते हैं और जीवन जीने के लिए बहुत से कठोर नियम बनाते हैं। यह हमें दोषी ठहराने के लिए नहीं है, क्योंकि हममें से हर कोई इस क्षण में जितना अच्छा कर सकता है कर रहा है। यदि हम बेहतर जानते और हमारे पास अधिक समझ एवं सजगता होती तो हम उसे अलग तरीके से करते।
कृपया अपनी स्थिति के लिए अपने आपको निचले स्तर पर न रखें। आपने यह पुस्तक उठाई और मुझे खोज निकाला, इसका अर्थ है कि आपे अपने जीवन में एक नया, सकारात्मक परिवर्तन लाना चाहते हैं। इसके लिए अपने आपको धन्यवाद दें। पुरुष रोते नहीं! महिलाएं पैसा नहीं संभाल सकतीं!' जीवन के लिए कितने संकुचित विचार हैं ये!
जब हम बहुत छोटे होते हैं तो अपने तथा जीवन के बारे में महसूस करना हम अपने आस-पास के बड़ों की प्रतिक्रियाओं से सीखते हैं। इस प्रकार हम अपने तथा अपनी दुनिया के विषय में सोचना सीखते हैं। अब यदि आप ऐसे लोगों के साथ रहे हैं, जो बहुत दु:खी, भयभीत, अपराध बोध से ग्रस्त या क्रुध थे तो अपने बारे में और अपनी दुनिया के बारे में बहुत सी नकारात्मक बातें सीखीं।
'मैं कभी भी सही नहीं करता', 'यह मेरी गलती है', 'यदि मुझे गुस्सा आता है तो मैं एक बुरा व्यक्ति हूं।' इस तरह के विचार एक निराशाजनक जीवन को जन्म देते हैं।
जब हम बड़े हो जाते हैं तो अपनी प्रवृत्ति के अनुसार प्रारंभिक जीवन के भावनात्मक वातावरण का पुन:सर्जन करते हैं।
यह अच्छा है या बुरा, सही है या गलत: यह वही होता है, जिसे हम अपने अंदर 'घर' के रूप में जानते हैं। साथ ही, हम अपने व्यक्तिगत संबंधों में उन संबंधों को फिर से जीवित करने का प्रयास करते हैं जो संबंध हमारा अपने मां या पिता के साथ या उनके बीच था। सोचिए कि कितनी बार आपका प्रेमी या बॉस बिल्कुल आपकी मां या आपके पिता की तरह था।
हम अपने साथ वैसा ही व्यवहार करते हैं, जो हमारे माता-पिता हमारे साथ करते थे। हम उसी तरीके से स्वयं को डांटते और सजा देते हैं। जब आप सुनते हैं तो लगभग उन शब्दों को सुन सकते हैं। एक बच्चें के रूप में जिस तरह हमें प्यार या प्रोत्साहित करते हैं।
'तुम कभी कुछ ठीक नहीं करते।' 'यह सब तुम्हारी गलती है।' आपने स्वयं से कितनी बार ऐसा कहा? 'तुम लाजवाब हो' 'मैं तुम्हें प्यार करता हूं।' आप कितनी बार खुद से ऐसा कहते हैं?
फिर भी, इसके लिए हम अपने माता-पिता को दोषी नहीं ठहराएंगे। हम सभी पीड़ितों द्वारा पीड़ित हैं, और शायद वे हमें कुछ ऐसा नहीं सिखा पाते जो वे जानत थे। यदि आपकी मां नहीं जानती थीं कि अपने आपसे प्यार कैसे करना है या आपके पिता नहीं जानते थे कि वह आपसे प्यार कैसे करें, तो उनके लिए आपकों खुद से प्यार करना सीखना असंभव था।
वे अपने बचपन में मिली शिक्षा के अनुसार सबकुछ अच्छा कर रहे थे। यदि आप अपने माता-पिता को अधिक समझना चाहते हैं तो उन्हें अपने बचपन के बारे में बताने के लिए प्रेरित कीजिए और यदि आप संवेदना के साथ सुनें तो आपको पता चलेगा कि उनकी शंकाएं और सख्ती कहां से आई हैं। जिन लोगों ने 'आपके साथ वह सब किया', वे आपकी तरह ही भयभीत और सहमे हुए थे।
मैं ऐसा मानती हूं कि हम स्वयं अपने माता-पिता का चुनाव करते हैं। हममें से हर कोई इस धरती पर एक सुनिश्चित समय और स्थान पर जन्म लेता है। हम यहां एक विशेष पाठ पढ़ने के लिए आएं हैं, जो हमें आध्यात्मिक विकास के पथ पर आगे बढ़ाएगा। हम अपना लिंग, अपना रंग, अपना देश चुनते हैं और फिर हम किसी खास माता-पिता को खोजते हैं, जो उस स्वरूप को प्रतिबिंबित करेंगे, जिस पर हम इस जीवन में काम करना चाहते हैं।
फिर जब हम बड़े होते हैं तो आम तौर पर अपने माता-पिता पर ऊंगली उठाते हैं और रिरियाते हुए शिकायत करते हैं,'आपने मेरे साथ ऐसा किया।' लेकिन वास्तव में हमने उन्हें इसलिए चुना, क्योंकि वे हमारे कार्यो के लिए बिलकुल उपयुक्त थे।
हमारे बचपन में ही हमारी आस्थाएं स्थापित होती हैं और फिर उन्हीं आस्थाओं का अनुभव करते हुए जीवन में आगे बढ़ते हैं। अपने जीवन में पीछे की ओर देखिए और ध्यान दीजिए कि कितनी बार आप उसी अनुभव से गुजरे हैं।
मेरा मानना है कि आपने उन अनुभवों को एक के बाद एक स्वयं बनाया, क्योंकि वे आपके अपने विश्वास को प्रतिबिंबित कर रहे थे। यह कोई मायने नहीं रखता कि हमें कितने लंबे समय से कोई समस्या परेशान कर रही थी या वह समस्या कितनी बड़ी है या वह हमारे जीवन के लिए कितनी घातक है।
(प्रभात प्रकाशन द्वारा प्रकाशित पुस्तक 'यू कैन हील योर लाइफ' से साभार)
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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