विश्वास जगा तो समझिए, सारे कार्य पूरे
सरश्री तेजपारखी
नई दिल्ली, 8 अक्टूबर (आईएएनएस)। जिस प्रकार का विश्वास आप रखते हैं, आपको वैसे ही सबूत मिलते हैं। जब आप यह यकीन रखेंगे कि दुनिया खूबसूरत है तो आपको सबूत भी वैसे ही मिलेंगे। अर्थात आपको जो भी लोग मिलेंगे, वे आपसे सामान्य या अच्छा व्यवहार ही करेंगे
जितना आप यह सोच रहे थे कि लोग बुरे हैं, लोग उतने बुरे नहीं हैं और उसके सबूत भी आपको मिलने लगते हैं। दुनिया के साथ लोग बुरे हो सकते हैं, मगर आपके साथ वे ही लोग अच्छा व्यवहार करेंगे, क्योंकि आपका विश्वास वह चीज उनसे बाहर लाता है। आपको पता नहीं है कि वे लोग आपके साथ ही क्यों अच्छा व्यवहार कर रहे हैं, बाकी लोगों के साथ तो वे बुरा चलते हैं।
आपके साथ कुछ बुरा हो रहा है, इसका अर्थ यह है कि आप भी अपनी ओर से उसे प्रोत्साहन दे रहे हैं कि 'मुझसे बुरा व्यवहार करो।' आपको लगता है कि सामनेवाला बुरा व्यवहार कर रहा है तो इसके लिए वहीं जिम्मेदार है, गलती केवल उसी की है। एक ही तरफ से पार्ट नहीं होता है, दोनों तरफ का रोल होता है। सामनेवाला आपसे बुरा व्यवहार कर रहा है यानी आप भी ऐसा कुछ कर रहे हैं, उसे प्रोत्साहन दे रहे हैं इसलिए वह वैसा व्यवहार कर रहा है। इसे एक उदाहरण से समझें।
बिना सर्किट पूर्ण हुए कोईभी बल्ब नहीं जल सकता। बल्ब जलना यानी सर्किट पूर्ण होना। अपने साथ यह देखें कि समस्या का लाल बल्ब जल रहा है? या आनंद का हरा बल्ब जल रहा है? हम किस तरह का सर्किट पूर्ण कर रहे हैं? हम जिस तरह का यकीन रखते हैं, सामनेवाला हमारे साथ वैसा ही व्यवहार करता है, क्योंकि दोनों तरफ का सर्किट पूर्ण होता है।
उपरोक्त उदाहरण से यह भी स्पष्ट किया जा रहा है कि जब भक्त और भगवान के बीच का सर्किट पूर्ण होगा तब कैसे चमत्कार होंगे..आपको किस तरह के सबूत मिलेंगे! कुछ लोग विश्वास रखते हैं कि जो भी हो रहा है वह अच्छे के लिए हो रहा है इसलिए उन्हें वैसे सबूत मिलते हैं। हर घटना के अंत में उन्हें उपहार मिलता है। यदि आप सर्वेक्षण करके देखेंगे तो आपको पता चलेगा कि पचास प्रतिशत से ज्यादा लोग ऐसा विश्वास रखते हैं कि जो हो रहा है, वह अच्छे के लिए हो रहा है। हालांकि उन्हें यह ज्ञात नहीं है कि उनका यह विश्वास भी बड़ा काम करनेवाला है।
कभी-कभी अवस्था, व्यवस्था या स्थान की वजह से विश्वास प्रकट हो जाता है और हमें कुछ चमत्कार दिखायी देते हैं। जो भी उदाहरण आपने इतिहास में पढ़े हैं, वे इसी विश्वास का नतीजा हैं। दोनों तरफ किसी वजह से विश्वास का सर्किट पूर्ण हुआ इसलिए चमत्कार हुआ। तात्पर्य यह है कि ईश्वर की तरफ से तो चीज लगातार दी ही जा रही है, उसे ग्रहण करने के लिए इंसान की तरफ से सर्किट पूर्ण नहीं हो रहा है।
कहीं न कहीं थोड़ा ढीला संपर्क है, इसलिए आनंद का हरा बल्ब नहीं जल रहा है। इंसान सोचता है, 'मेरे जीवन में यह क्यों नहीं हो रहा है.. वह क्यों नहीं हो रहा है?' तब उससे कहा जाता है कि जरा स्वपरीक्षण करके देखें, सर्किट चेक करें। कहीं कोई थोड़ी वायर निकली हुई होगी, बस! वरना बड़ी समस्या नहीं होगी। इसे एक उदाहरण से यूं समझा जा सकता है।
एक मेले में बिजली चली जाने की वजह से पूरे मेले में अंधेरा छा जाता है। तब मेले के कर्मचारी यह परीक्षण करते हैं कि कहीं कोई तार टूट तो नहीं गई। कहीं कोई लूज कनेक्शन तो नहीं होगा। परीक्षण के उपरांत उन्हें वह टूटी हुई तार मिल जाती है, जिसके जुड़ते ही पूरा मेला प्रकाशमय हो जाता है। बिजली के आते ही संगीत, झूले, गाड़ियां, सभी चीजें फिर से शुरू हो जाती हैं। अब आप सोचें कि इसके लिए क्या किया गया? सिर्फ एक तार ही तो जोड़ी गई और सब प्रकाश में आ गया।
इसी तरह आप पर ईश्वर की कृपा लगातार बरस ही रही है। आपका अविश्वास का छाता हट गया तो समझिए सर्किट पूरा हो गया। विश्वास के जगते ही सारे कार्य पूरे होने लगते हैं।
(डायमंड पॉकेट बुक्स प्रा. लि. द्वारा प्रकाशित पुस्तक 'आत्मविश्वास सफलता का द्वार' से साभार)
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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