विश्वास से खुलता है सफलता का द्वार
सरश्री तेजपारखी
नई दिल्ली, 7 अक्टूबर (आईएएनएस)। मन संसार में तब भागता है, जब उसे कोई चीज आकर्षित करती है। मन अंदर भी जा सकता है, जब उसे सत्य आकर्षित करता है। जिस बात को जानने के लिए मन बाहर जाता है, वह आम बात होती है। हर इंसान का मन मनोरंजन, सुख-सुविधा, नाम-शोहरत, रंग-रूप, स्पर्श-सुगंध, स्वर-स्वाद से आकर्षित होता है।
जिन बातों से मन अंदर जाता है, वह खास बात होती है, क्योंकि मन को अंदर आकर्षित करने के लिए अनेक नहीं, बस एक ही बात होती है।
खास बात सबसे अलग होती है। खास बात यह है कि मन विश्वास की शक्ति से नमन हो सकता है। नमन का अर्थ है 'न-मन'। मन जब नमन होता है तब एक अलग तरह का आनंद शुरू होता है।
आज तक लोग यही सोचते आए हैं कि मन के जिस हिस्से से परेशानी है, उसे काट डालें और जो हिस्सा खुशी दे रहा है, उसे रहने दें। इस वजह से लोगों का जीवन झूठे आनंद में ही बीत जाता है। फिर जब उन्हें खास बात पता चलती है कि मन 'न मन', 'वर्तमान', 'एक मन' (सिंगल माइंडेड) हो सकता है तब मन के साथ कुछ ऐसा होता है, जिसकी वजह से यही मन तेज आनंद का कारण बनने लगता है। अत: मन नमन होने के बाद ही हमारे जीवन में खास बातें शुरू हो जाती हैं।
विश्वास मन को सुंदर बनाता है : यदि किसी से यह प्रश्न पूछा जाए कि 'जब आप आम खरीदने जाते हैं तब आप क्या देखकर आम खरीदते हैं?' या दूसरी कोई भी चीज खरीदते वक्त आप उसमें क्या देखकर उसकी खरीददारी करते हैं? जब आप लोगों का मन पढ़ने की कोशिश करते हैं तब आप क्या देखकर अनुमान लगाते हैं?
इसके जवाब में एक बात तो निश्चित है कि आम खरीदते वक्त इंसान जिस चीज (खाल) को देखकर आम खरीदता है, उसे वह नहीं खाता बल्कि जिसे उसके अंदर महसूस किया गया, उसे खाता है। अर्थात् इंसान आम की खाल देखकर आम खरीदता है लेकिन खाल नहीं खाता। आम यदि अच्छा हो, मीठा हो तो वह खाल से बाहर झांकता है यानी आपको खाल से पता चल जाता है कि आम अंदर से कैसा होगा।
इसी तरह जिस मन में विश्वास होता है, वह मन सुंदर होता है। वह मन सबको आकर्षित करता है।
जब आप आम खरीदने बाजार जाते हैं तब आप बाजार में बिकनेवाले हर तरह के आम गौर से देखते हैं, आप झट से कोई भी आम नहीं खरीद लेते। आप आमों का ठीक से निरीक्षण करने के पश्चात ही आम खरीदते हैं। जैसे - आम का छिलका, उसकी खुशबू, उसका रंग-रूप। आप छिलका हालांकि नहीं खाते परंतु खरीदते वक्त उसे भी देखते हैं।
आम के अंदर जो है और जो बाहर झांक रहा है, वह भी आप देखते हैं क्योंकि जो बाहर झांक रहा है वह बता रहा है कि 'मैं यह हूं, आप मुझे पसंद करते हैं तो खरीदें।' इंसान को जब विश्वास हो जाता है कि यह आम बहुत स्वादिष्ट होगा, मीठा होगा, जैसा उसे चाहिए वैसा होगा, मौसम के अनुसार उसकी जो जरूरत है, वह इस आम से पूरी होगी तो ही वह वे आम खरीदता है। इस खरीददारी में इंसान को कोई दिक्कत ही नहीं है, क्योंकि उसे पता है कि आम कैसे खरीदते हैं। हर इंसान के मन से जो चीज बाहर झांक रही है, वह कौन सी चीज है, उसे हमें समझना है।
मन के पीछे क्या झांक रहा है : आम की ही तरह मन के अंदर भी एक ऐसी चीज है, जो हर इंसान के अंदर से उसके चहरे, हाव-भाव और चाल-चलन से बाहर झांक रही है। यह चीज है 'विश्वास'।
विश्वास की लाली से ही जीवन की काली रात कट जाती है और सफलता का सूरज चमकता है। विश्वास वह चीज देख लेता है, जो हमारी बुद्धि नहीं देख सकती। इसलिए हम इस विश्वास को देखना सीखें, उसे प्रकट (रिलीज करना सीखें।) मन विचारों की पोटली है, जिसे देखकर बताया जा सकता है कि उसके अंदर से क्या झांक रहा है। इंसान के विचार ही बताते हैं कि वह किस अवस्था में है, बीमार अवस्था में है या स्वस्थ (स्व में स्थित) अवस्था में है। इस मन को हम आम के उदाहरण से समझने की कोशिश कर रहे हैं, जो जीवन में सफलता दिलाने के लिए बहुत ही खास है।
पेड़ पर आम लटकता है, वह जड़ से खाद खींचता है। उसकी मूल अवस्था गहराई में, जमीन के अंदर होती है। वहां से आम अपनी खुराक लेता है। अगर उसकी व्यवस्था सही की गई, उसे सही समय पर पानी दिया गया तो उस आम के अंदर जो चीज है, जो बाहर झांक रही है, वह बहुत स्वस्थ होगी और उसका विकास बहुत सुंदर ढंग से होगा।
आम खाने के बाद अक्सर गुठली फेंक देनी पड़ती है। आम के साथ यह कहावत भी सभी जानते हैं कि 'आम के आम गुठलियों के दाम' यानी गुठली हमेशा फेंकी नहीं जाती बल्कि उसका भी प्राय: पूरा फायदा लिया जाता है। वैसे ही यहां तोलू मन (गुठली) का भी हमें पूरा-पूरा फायदा उठाना है ताकि 'आम के आम गुठलियों के दाम' वाली कहावत चरितार्थ हो जाए। आम बात में तो आम का सड़ा हिस्सा काटकर फेंक देते हैं परंतु खास बात में मन के सड़े हिस्से (तोलू मन) से हमें फायदा लेना सीखना है।
साधारण आम के साथ ऐसा संभव नहीं है परंतु मन के साथ यह संभव है। खास बात यह है कि आम, न-आम नहीं हो सकता किंतु मन, न-मन हो सकता है।
इन बिंदुओं पर मनन करें :
* खास बात यह है कि मन विश्वास की शक्ति से नमन हो सकता है।
* मन जब न-मन, वर्तमन और एक मन (सिंगल माइंड) होता है तभी वह आनंद का कारण बनता है।
* इंसान आम की खाल देकर आम खरीदता है लेकिन खाल नहीं खाता।
* आम के खाल की तरह इंसान के मन से भी विश्वास बाहर झांकता है। विश्वास की लाली से ही जीवन की काली रात कट जाती है।
* जिस तरह आम के हर भाग का फायदा उठाया जाता है, उसी तरह हमें भी मन के हर हिस्से का सही ढंग से फायदा उठाना सीखना चाहिए।
* खास बात यह है कि आम, न-आम नहीं हो सकता किंतु मन, न-मन हो सकता है।
(डायमंड पॉकेट बुक्स प्रा. लि. द्वारा प्रकाशित पुस्तक 'आत्मविश्वास सफलता का द्वार' से साभार)
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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