ताकत से भी आता है विश्वास

विश्वास की परिभाषा पांच प्रकार से की जा सकती है। परिभाषा जानने पर आप यह समझ पाएंगे कि बाहर के जगत में किस आधार पर लोग विश्वास प्रकट कर सकते हैं।

बल से प्रकट हुआ विश्वास : कुछ विश्वास बल, यानी शारीरिक ताकत की वजह से इंसान में आता है। एक इंसान जब कराटे सीखकर आता है, तब उसमें से कुछ झांक रहा होता है। उसे एक विश्वास महसूस होता है कि 'कोई अब मुझ पर आक्रमण करे तब उसे मैं देख लूंगा' उसे अपने बल व हुनर पर विश्वास होने लगता है।

हठ योगी और सिद्धियां प्राप्त करनेवाले में भी इस वजह से विश्वास होता है कि 'मेरे पास फलां-फलां सिद्धि और ज्ञान है। अगर कोई गुस्सा दिलाएगा तो उसे मैं भस्म कर सकता हूं।' उसे सांप के काटने का भी डर नहीं होता है, क्योंकि उसके पास सिद्धि का मंत्र होता है। ऐसा इंसान जंगल में भी बिना डरे, निडर होकर चलता है। यह अवस्था अपने अंदर लाने के लिए उसने तप द्वारा आत्मविश्वास प्राप्त किया होता है।

निरीक्षण से आया विश्वास : जब कई लोग एक्शन फिल्म देखकर आते हैं तब थोड़ी देर के लिए वे बड़े विश्वास से चलते हैं, क्योंकि उन्होंने फिल्म के हीरों को बारीकी से देखा होता है, उसका निरीक्षण किया होता है। जिस कारण थोड़ी देर के लिए क्यों न हो मगर उन्हें लगता है कि उनमें बहुत विश्वास आ गया है। वे भी उस हीरो की तरह नकल करने लगते हैं, आत्मविश्वास से चलने लगते हैं।

नाम, शोहरत से आया हुआ विश्वास : एक इंसान गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में अपना नाम दर्ज कराता है। वह कुछ ऐसे करतब कर दिखाता है, जो बाकी लोग नहीं कर पाते। हजारों लोग उसे देखने आते हैं। उस वक्त वह बहुत विश्वास से चलता है। चारों तरफ उसकी वाह-वाह होती है, उसका नाम होता है। यह विश्वास नाम और शोहरत की वजह से आया हुआ विश्वास है।

पैसे से आया हुआ विश्वास : कुछ लोग ऐसे होते हैं, जिनका विश्वास उनके पैसों पर टिका होता है। यदि किसी की लॉटरी लगी हो और वह मैच देखने गया हो तो उसे यही विचार आएगा कि 'मैच फिक्स करवा दूं' क्योंकि उसका पूरा विश्वास उसके पैसे पर टिका हुआ है। जब से उसकी लॉटरी लगी तब से वह विश्वास से चलने लगा, वरना उसके पहले तो उसे ऐसे विचार भी नहीं आते थे। उसका विश्वास उसे घमंडी या कंजूस बना सकता है। इसलिए पैसे को सही दिशा मिलना आवश्यक है।

कुर्सी से आया हुआ विश्वास : इंसान जब चुनाव जीतकर आता है, तब उसे भी विश्वास आता है, भले ही फिर उसमें वह विश्वास पांच साल के लिए ही क्यों न आया हो। जिसके पास कुर्सी, रानीतिक शक्ति है, वह इंसान सोचेगा, 'अंडरवर्ल्ड से संपर्क करें.. किसी को धमकी दिलवाएं, किसी को डराएं, किसी ने कुछ किया तो उसे खत्म करवा दें' इत्यादि। कुर्सी की शक्ति उसके अंदर उछल रही होती है, मगर उसे यह नहीं पता कि ऐसा विश्वास उसे और बदतर ही बनाता जाएगा, उसका विश्वासघात ही करता जाएगा।

ये पांचों तरह के विश्वास किसी न किसी घटनाओं पर आधारित हैं। इस तरह का विश्वास केवल फिक्सिंग ही करवा सकता है। ऐसा विश्वास दु:ख आए तो पक्का करेगा और लेबल लगाएगा कि 'यह दुख हमेशा रहेगा, मैं हमेशा दुखी रहूंगा' और वह रोते-धोते ही रहेगा। कुछ भी हुआ तो वह पक्का ही करता है। सुख आया तो उसे भी पक्का करता है कि 'कहीं यह सुख चला न जाए।' उसे यह नहीं पता कि पक्का करना, लेबल लगाना, चीजों को पकड़ना ही उसके दुख का कारण है।

इस तरह का विश्वास इंसान को बहुत दूर तक नहीं ले जाएगा, क्योंकि हर विश्वास की एक सीमा है कि 'यहां-यहां तक वह विश्वास पहुंचा सकता है, जो आपको कुछ सीमित क्षेत्र तक ही मार्गदर्शन दे सकता है यानी उसमें अभी सौ प्रतिशत विश्वास प्रकट नहीं हुआ है।'

(डायमंड पॉकेट बुक्स प्रा. लि. द्वारा प्रकाशित पुस्तक 'आत्मविश्वास सफलता का द्वार' से साभार।)

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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