अयोध्या फैसले ने आस्था को मान्यता दी : आडवाणी
आडवाणी ने अपने ब्लाग पर "यह धर्म बनाम कानून नहीं है, यह कानून द्वारा धर्म को मान्यता दी गई है" शीर्षक वाले ताजा पोस्ट में लिखा है कि उन्हें यह कहने में अपार खुशी हो रही है कि इलाहाबाद उच्च न्यायालय द्वारा 30 सितम्बर को दिए गए ऐतिहासिक फैसले के बाद , "देश ऐसे बिंदु पर पहुंचा गया है, जहां न्यायिक फैसला हिंदू और मुस्लिम समुदायों के प्रतिनिधियों के बीच एक सौहाद्र्रपूर्ण समझौते का आधार तैयार कर सकता है।"
आडवाणी ने कहा, "आरएसएस (राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ) और भाजपा ने जैसा कहा था, इस फैसले ने उस सच्चाई को मान्यता दे दी है कि देश में लाखों लोगों का मानना है कि जिस स्थान पर राम लला का अस्थायी मंदिर है, राम जन्मभूमि वहीं है।"
आडवाणी ने कहा कि उन्होंने वर्ष 2008 में प्रकाशित अपनी आत्मकथा में संकेत किया था कि अटल बिहारी वाजपेयी के प्रधानमंत्रित्व काल (1998-2004) में अयोध्या विवाद का कोई समाधान होने वाला था।
अपनी आत्मकथा का जिक्र करते हुए आडवाणी ने कहा है कि अयोध्या आंदोलन में एक प्रमुख भागीदार के रूप में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) सरकार के छह साल के शासन के दौरान उनका पूरा प्रयास रहा कि यह विवाद जल्द से जल्द, शांतिपूर्ण तरीके से सुलझ जाए।
आडवाणी ने लिखा है, "विवाद के समाधान के तीन विकल्प स्पष्ट थे : पहला संविधान निर्माण, दूसरा न्यायिक फैसला और तीसरा हिंदू एवं मुस्लिम समुदायों के प्रतिनिधियों के बीच सौहाद्र्रपूर्ण समझौता।"
आडवाणी ने लिखा है, "एक उचित समझौते के सिद्धांत और रास्ते 2004 के प्रारंभ में उभर कर सामने आए थे, और दोनों पक्षों द्वारा यह तय किया गया था कि 14वीं लोकसभा के चुनाव के ठीक बाद इस समझौते की घोषणा कर दी जाएगी। निश्चितरूप से दोनों पक्षों को यह उम्मीद थी कि वाजपेयी सरकार नए जनादेश के साथ दोबारा सत्ता में आएगी और आपस में स्वीकृत फार्मूले को कार्यान्वित करेगी। लेकिन दुर्भाग्यवश ऐसा न हो सका।"
आडवाणी ने लिखा है, "मुझे आज यह कहते हुए अपार खुशी हो रही है कि इलाहाबाद उच्च न्यायालय द्वारा दिए गए ऐतिहासिक फैसले के बाद देश ऐसे बिंदु पर पहुंच गया है, जहां ऊपर जिक्र किए गए तीन विकल्पों में से दूसरे और तीसरे विकल्प को अच्छी तरह आजमाया जा सकता है।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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