अयोध्या फैसला : 'अब विवाद को दफन कर दें'

अयोध्या, 30 सितम्बर (आईएएनएस)। अयोध्या के अधिकांश नागरिक चाहते हैं कि अयोध्या मामले के विभिन्न पक्षकारों को उच्च न्यायालय के फैसले को मान लेना चाहिए और सर्वोच्च न्यायालय नहीं जाना चाहिए, क्योंकि इससे एक बार फिर कानूनी जंग शुरू हो जाएगी और किसी निष्कर्ष पर पहुंचने में कई अतिरिक्त वर्ष लग सकते हैं।

राम कोट वार्ड के पार्षद हाजी असद अहमद ने आईएएनएस से कहा, "हमने वह सबकुछ देखा है कि मामले में क्या कुछ हुआ है, जिसमें कि उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ ने गुरुवार को अपना फैसला सुनाया है.. इस फैसले को आने में 60 वर्ष लगे हैं.. इसलिए हम नहीं चाहते कि फिर से कोई कानूनी लड़ाई शुरू हो जाए। हम इस मामले से जुड़े सभी पक्षों से आग्रह करते हैं कि जनहित में सर्वोच्च न्यायालय न जाएं।"

सेवानिवृत्त शिक्षक अब्दुल कयूम भी ऐसा ही मानते हैं। उन्होंने कहा, "आपको अब महसूस कर लेना चाहिए कि देश का आम नागरिक, खासतौर से यहां के निवासी, नहीं चाहते कि यह विवाद अब और आगे तक जिंदा रहे.. आम जनता बहुत अच्छी तरह जानती है कि इस मामले में उनके लिए जीतने-हारने जैसा कुछ भी नहीं है, जिसे कि अतीत में राजनीतिक पार्टियों द्वारा खूब भुनाया गया है।"

कयूम ने कहा, "युगों पुराने इस विवाद से अयोध्या के लोग बुरी तरह प्रभावित रहे हैं.. यदि आप उनसे पूछें तो वे बताएंगे कि सुरक्षा जांच, फ्लैग मार्च और अन्य तरह के अभियानों के दौरान उनकी जिंदगी किस तरह कटती है।"

साकेत महाविद्यालय में परास्नातक के छात्र चंदन पांडे ने कहा, "बहुत हो चुका.. इस फैसले में 60 वर्ष लगे हैं। अब समय आ गया है, जब इस विवाद को दफन कर देना चाहिए। यहां के मुसलमान और हिंदू महसूस करते हैं कि उच्च न्यायालय के फैसले को कानूनी लड़ाई का अंत माना जाना चाहिए।"

यहां कोचिंग सेटर चलाने वाले करुणा शंकर ने कहा कि युगों पुराने विवाद को जिंदा रखने के बदले, यहां विकास, शिक्षा और अधोसंरचना से संबंधित तमाम मुद्दों पर तत्काल ध्यान केंद्रित करने की आवश्यकता है।

करुणा शंकर ने कहा, "अयोध्या में हमें अस्पताल की जरूरत है, युवकों के लिए रोजगार की जरूरत है, बेहतर शिक्षण संस्थानों की आवश्यकता है। हमें अयोध्या के सर्वागीण विकास की जरूरत है। यदि यह विवाद ही केंद्र में बना रहा तो अयोध्या का कभी विकास नहीं हो पाएगा.. यदि हम यह कहें तो गलत नहीं होगा कि पिछले कई वर्षो से अयोध्या का विकास रुक गया है।"

नागरिकों का मानना है कि हिंदू संतो और मुस्लिम मौलानाओं को चाहिए कि वे इस बात को सामने रखने के लिए पहल करें कि इस मुद्दे से आम आदमी को कुछ भी नहीं हासिल होने वाला है।

यहां के पानजी टोला निवासी कासिम मालिद ने कहा, "दोनों समुदायों के धर्मगुरुओं को सभी पक्षों से अपील करना चाहिए कि इस विवाद को यहीं पर खत्म कर दिया जाए। वे मामले के शांतिपूर्ण समाधान के लिए आवश्यक कदम भी उठा सकते हैं।"

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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