साहित्यकार कन्हैयालाल नंदन का निधन

साहित्यकार कन्हैयालाल नंदन का निधन

हिंदी के चर्चित पत्रकार और साहित्यकार कन्हैयालाल नंदन का शनिवार की सुबह दिल्ली में निधन हो गया. वे 77 वर्ष के थे.

पिछले काफ़ी समय से वे डायलिसिस पर थे.

कन्हैयालाल नंदन का जन्म उत्तर प्रदेश के फतेहपुर ज़िले में एक जुलाई 1933 को हुआ था.

उनके निधन पर साहित्य और पत्रकारिता जगत के लोगों ने शोक व्यक्त किया है.

सूचना एवं प्रसारण मंत्री अंबिका सोनी ने कहा, "कन्हैयालाल नंदन के निधन से हिन्दी साहित्य और पत्रकारिता के क्षेत्र में आयी रिक्तता को भरना बेहद मुश्किल है. नंदन एक विचारशील लेखक थे, जिनमें कई पीढ़ियों से संवाद करने की क्षमता थी."

चर्चित पत्रकार

उधर भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी ने 'नंदन' के निधन पर शोक व्यक्त करते हुए कहा कि उनका जाना भारतीय साहित्य और पत्रकारिता के लिए एक अपूरणीय क्षति है.

साहित्यिक हलकों में कन्हैयालाल नंदन एक कवि के रूप में जितने चर्चित रहे, उतनी ही ख्याति उन्हें पत्रकारिता के जगत में मिली.

एक मंचीय कवि के रूप में उनकी पहुँच एक बहुत बड़े श्रोता वर्ग तक थी.

वे पराग, सारिका और दिनमान के संपादन विभाग से जुड़े रहे.

लुकुआ का शाहनामा, घाट-घाट का पानी, आग के रंग, समय की दहलीज, बंजर धरती पर इंद्रधनुष, गुज़रा कहाँ कहाँ से उनकी प्रमुख कृतियाँ हैं.

भारतेंदु पुरस्कार, अज्ञेय पुरस्कार समेत उन्हें कई पुरस्कारों से नवाजा गया.

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