जन वितरण प्रणाली में मजूबती से ही गरीबी में सुधार संभव : रेड्डी (लीड-1)

संयुक्त राष्ट्र विश्व खाद्य कार्यक्रम और एम.एस. स्वामीनाथन फाउंडेशन की ओर से 'शहरी भारत में खाद्य असुरक्षा' पर एक रिपोर्ट जारी करने के बाद रेड्डी ने ये बातें कहीं। यह रिपोर्ट देश के 15 राज्यों के सरकारी आंकड़ों पर आधारित है। रिपोर्ट जारी करते समय प्रसिद्ध कृषि वैज्ञानिक एम.एस. स्वामीनाथन भी मौजूद थे।

रेड्डी ने कहा, "रिपोर्ट में कुछ ऐसे खुलासे हुए हैं जो चकित करने वाले हैं। मसलन विश्व में सर्वाधिक 48 फीसदी अविकसित बच्चों (पांच वर्ष से कम) का भारत में होना, कुपोषण से 50 फीसदी बच्चों का मरना, देश में 70 फीसदी बच्चों और 55 फीसदी महिलाओं का एनिमिया से ग्रसित होना है। हमें इन चिंताओं को दूर करने की जरूरत है।"

उन्होंने कहा, "विकास दर में वृद्धि शहरी इलाकों के गरीबों की स्थिति में सुधार की ओर कोई संकेत नहीं करते। जन वितरण प्रणाली देश के उत्तरी राज्यों में बहुत कमजोर है। इसलिए जब तक कि जन वितरण प्रणाली को, वह भी झुग्गी-झोपड़ियों तक में मजबूत नहीं किया जाता यह संभव नहीं है। राज्य सरकारों को इस दिशा में अपना ध्यान केंद्रित करना होगा।"

रिपोर्ट में देश के शहरी क्षेत्रों में खाद्य असुरक्षा की स्थिति को लेकर चिंता जाहिर की गई है। इसमें कहा गया है, "भारत के शहरी इलाकों में शौचालय से जुड़ी सुविधाओं और महिलाओं के रोजगार में वृद्धि के संकेत है परंतु महिलाओं और बच्चों के लिए पोषाहार की उपलब्धता में गिरावट देखी गई है।"

रिपोर्ट में खाद्य असुरक्षा का जिक्र करते हुए इसमें सुधार पर बल दिया गया है। रिपोर्ट जारी करने के मौके पर स्वामीनाथन ने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के एक कथन का उल्लेख करते हुए कहा, "हर भूखे के लिए रोटी भगवान की तरह होती है। हमें कोशिश करनी चाहिए कि यह भगवान हर घर में मौजूद रहे। इसके लिए हमें साहसिक कदम उठाने की जरूरत है।"

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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