बिहार और पश्चिमी उप्र में नदियों के जलस्तर में कमी (लीड-1)

बिहार में गोपालगंज के जिलाधिकारी बाला मुरुगन ने शनिवार को बताया कि पांच राहत शिविर चलाए जा रहे हैं, जिनमें सारी सुविधाएं मुहैया कराई गई हैं। उन्होंने कहा कि कई गांवों के लोग अब अपने घरों की ओर लौटने लगे हैं। गांवों में हुए नुकसान का आकलन कर पूरी रिपोर्ट तैयार कराई जा रही है।

बिहार में सबसे खराब स्थिति गंडक नदी के तटबंध के मुहाने पर बसे सेमरिया गांव की है, जहां कई मकान क्षतिग्रस्त हो गए हैं। आधिकारिक सूत्रों के अनुसार गांव के करीब तीन दर्जन मकान गंडक नदी के जल प्रवाह में बह गए हैं। राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या 28 पर अब आवागमन पूरी तरह से सामान्य हो गया है। बाढ़ से करीब 500 गांवों की पांच लाख से अधिक आबादी प्रभावित हुई है।

राष्ट्रीय आपदा अनुक्रिया बल (एनडीआरएफ) द्वारा प्रभावित क्षेत्रों में स्वास्थ्य शिविर लगाया जा रहा है। शिविरों में बाढ़ पीड़ितों को मुफ्त चिकित्सा सुविधा दी जा रही हैं। एनडीआरएफ के एक अधिकारी के मुताबिक रूपनछाप में गुरुवार और शुक्रवार को लगे स्वास्थ्य शिविर में करीब 1,200 लोगों का इलाज किया गया।

उधर, उत्तरप्रदेश में रामगंगा, मालन, कोसी और गंगा नदी के उफान पर आने से बिजनौर, अमरोहा, शाहजहांपुर, बरेली, रामपुर, बुलंदशहर, सहारनपुर, बदायूं और फरुखाबाद जिलों के निचले इलाकों में 500 से अधिक गांवों में बाढ़ का पानी घुस गया था।

बिजनौर से अपर जिलाधिकारी (वित्त) रेवा राम सिंह ने शनिवार को आईएएनएस को बताया कि पिछले दो-तीन दिनों से उत्तराखण्ड के बांधों से बड़ी मात्रा में पानी नहीं छोड़ा गया है। इससे गंगा, रामगंगा जैसी नदियों के जलस्तर में कमी आने से हालात में सुधार हो रहा है। प्रभावित इलाकों में युद्धस्तर पर राहत कार्य जारी है।

उन्होंने बताया कि रामगंगा में तेज बहाव से टूटे हरेवली बांध पर मरम्मत का काम चल रहा है। इस बांध के टूटने से दिल्ली-हरिद्वार राष्ट्रीय राजमार्ग-74 पानी में डूबा हुआ है।

मुरादाबाद में हालात में पहले से थोड़ा सुधार आया है। जिन रिहायशी इलाकों में तीन से चार फुट तक पानी भर गया था, वहां कोसी के जलस्तर में गिरावट आने से पानी का स्तर अब कम हो रहा है।

उधर, पूर्वी उत्तर प्रदेश में 12 जिले बाढ़ की चपेट में हैं। राज्य के राजस्व विभाग के प्रमुख सचिव के. के. सिन्हा ने कहा कि प्रदेश में अब तक बाढ़ से 86 मौतें हुई हैं।

इस बीच, उत्तर प्रदेश, बिहार और उत्तराखण्ड में बाढ़ की चपेट में आए लाखों लोगों की मदद के लिए संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (यूनिसेफ)राहत सामग्री भेज रहा है। यूनिसेफ द्वारा भेजी जा रही राहत सामग्री में तिरपाल, चादरें, जल शुद्धिकरण के लिए गोलियां, मच्छरदानियां एवं अन्य वस्तुएं शामिल हैं।

संगठन द्वारा भेजी जा रही राहत सामग्री उत्तर प्रदेश में बाढ़ के कारण विस्थापित 8,000 परिवारों तथा सबसे अधिक प्रभावित 10 जिलों के 10,000 परिवारों में वितरित की जाएगी।

यूनिसेफ की तरफ से जारी एक प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है कि उत्तर प्रदेश में लगभग 17 लाख लोग बाढ़ से प्रभावित हैं। राज्य सरकार ने बाढ़ राहत सामग्री के वितरण के लिए 276 राहत शिविर स्थापित किए हैं।

केंद्र सरकार ने भी प्रभावित इलाकों में राहत सामग्री भेजी है और राष्ट्रीय आपदा अनुक्रिया बल (एनडीआरएफ) की टीमों को उत्तराखण्ड के हरिद्वार, ऋषिकेश तथा बिहार के गोपालगंज जिले में तैनात किया गया है। इसके अलावा उत्तर प्रदेश के रामपुर जिले में भी टीमों की तैनाती की गई है।

दूसरी ओर हरियाणा के हथिनीकुंड बैराज से तीन लाख 30 हजार क्यूसेक पानी छोड़े जाने के कारण शनिवार को यमुना का जल स्तर एक बार फिर बढ़ने की आशंका है।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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