रेलगाड़ियों की पहचान संख्या अब 5 अंकों की (लीड-1)
नई दिल्ली, 23 सितम्बर (आईएएनएस)। भारतीय रेलवे की नियमित एक्सप्रेस, मेल और सुपर फास्ट रेलगाड़ियों के मौजूदा चार अंकों में एक अंक और जोड़ा जाएगा। इसके साथ ही रेलगाड़ियों की पहचान संख्या अब बढ़कर पांच अंक की हो जाएगी। यह फैसला दिसम्बर से लागू होगा।
रेल मंत्रालय ने एक बयान जारी कर कहा कि नई प्रणाली काफी आवश्यक हो गई थी। चार अंकों की प्रणाली के तहत अधिकतम 9,999 तक ही रेलगाड़ियों की संख्या का प्रयोग किया जा सकता था। रेलवे प्रतिदिन 10,000 से अधिक रेलगाड़ियों का परिचालन करता है।
बयान में कहा गया है कि रेलगाड़ियों का नया नम्बर वैज्ञानिक, तार्किक एंव कम्प्यूटर के अनुकूल होगा। बयान के मुताबिक रेलगाड़ियों के नामों में बदलाव नहीं किया जाएगा।
दूरंतो, युवा ट्रेन, राजधानी एक्सप्रेस, शताब्दी एक्सप्रेस, जनशताब्दी एक्सप्रेस, गरीब रथ एक्सप्रेस और संपर्क क्रांति एक्सप्रेस जैसी रेलगाड़ियों में 1 अंक शामिल किया जाएगा।
बयान के मुताबिक सभी यात्री रेलगाड़ियों और उपनगरीय रेलगाड़ियों को भी पांच अंकों की इस प्रणाली में शामिल करने का प्रस्ताव रखा गया है। इस बदलाव से संबंधित जानकारी रेलवे के जोनल कार्यालयों को भेज दी जाएंगी।
रेल मंत्रालय के अनुसार रेलगाड़ियों के नामों को न तो बदला जा रहा है और न ही कोई अन्य परिवर्तन किया जा रहा है। मौजूदा चार अंकों की संख्याओं में सिर्फ संख्या 1 को उसके पहले जोड़ देने मात्र से ही सभी संख्याओं को नई पांच अंकीय प्रणाली में परिवर्तित कर लिया जाएगा।
उल्लेखनीय है कि अवकाश या त्योहार की भीड़ से निबटने के लिए रेलवे जो विशेष रेलगाड़यां चलाता है उनकी भी संख्या मेल एक्सप्रेस की प्रणाली पर ही लगाई जाती है। केवल उनसे पहले संख्या 0 लगा दी जाती है। यही प्रक्रिया सभी विशेष रेलगाड़ियों पर लागू की जाएगी। संख्या निर्धारित करने की यह स्कीम फुल टैरिफ रेटों (एफटीआर) के आधार पर चलने वाली विशेष रेलगाड़ियों पर भी लागू होगी।
पैसेंजर रेलगाड़ियों तथा उपनगरीय रेल गाड़ियों को भी इस नई पांच अंकीय प्रणाली के अंतर्गत लाने तथा सम्बद्ध क्षेत्रीय रेलवे द्वारा ऐसे बदलावों की अलग अधिसूचना जारी करने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। भारतीय रेलवे प्रतिदिन 10 हजार से अधिक रेल गाड़ियों का संचालन करती है, जिस वजह से चार अंकों की संख्या स्कीम समाप्तप्राय हो जाती है।
विभिन्न सूचना प्रणालियों जैसे- नियंत्रण कार्यालय अनुप्रयोग, यात्री आरक्षण प्रणाली तथा अन्य साफ्टवेयर अनुप्रयोगों को समेकित करने की भी आवश्यकता पड़ती है। ऐसी स्थित में पांच अंकों की संख्याओं वाली डिजिटल प्रणाली पर निर्भर होना आवश्यक हो जाता है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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