गर्भवती महिला की अनोखी शल्य चिकित्सा (फोटो सहित)
यहां सायन अस्पताल में प्रसूति एवं स्त्रीरोग विभाग के प्रमुख, निरंजन चव्हाण ने बुधवार को आईएएनएस को बताया, "भारत में अपने तरह का यह पहला मामला है। इस विधि के जरिए हम अजन्मे बच्चे की जिंदगी बचा पाने में सफल हुए हैं।"
मुंबई निवासी यह महिला रोगी लगभग एक महीना पूर्व पेट में तेज दर्द के साथ पहुंची थी। कई जांचों और परीक्षणों के बाद पता चला कि उसके गर्भाशय में बाई ओर सात महीना पुराना एक बड़ा ट्यूमर है। महिला पहले से चार महीने की गर्भवती थी।
चव्हाण ने कहा, "जैसे-जैसे गर्भावस्था का समय बीतता, विशाल ट्यूमर भ्रूण पर दबाव बनाता। परिणामस्वरूप या तो गर्भपात हो जाता या अन्य स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के साथ मरे हुए बच्चे का जन्म होता।"
चव्हाण और उनकी टीम ने महिला के गर्भाशय से उस ट्यूमर को हटाने का निर्णय लिया, क्योंकि यह उसके गर्भ के लिए खतरा था। चार महीने के गर्भ में ट्यूमर नाभि से चार अंगुल ऊपर बढ़ गया था। लिहाजा रोगी के लिए लेप्रोस्कोपिक सिस्टेक्टोमी का निर्णय लिया गया।
चव्हाण ने कहा, "31 अगस्त को महिला का सफल आपरेशन कर दिया गया और एक बड़ा ट्यूमर गर्भाशय से निकाल दिया गया।"
चव्हाण के प्रयासों की सराहना करते हुए सायन अस्पताल की डीन संध्या कामत ने कहा कि इस अस्पताल में इस तरह का यह पहला मामला है। कामत ने कहा, "यह एक असामान्य, चुनौतीपूर्ण और अनोखा मामला है।"
चव्हाण ने कहा कि आपरेशन के दो सप्ताह हो गए हैं और रोगी स्वस्थ है। उसके भ्रूण को भी कोई खतरा नहीं है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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