प्रधानमंत्री का कश्मीरी गुटों को बातचीत का प्रस्ताव (लीड-1)
प्रधानमंत्री ने यहां सैन्य कमांडरों के संयुक्त सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा, "हम अपने संविधान के दायरे में हर उस शख्स और समूह से बातचीत करने को तैयार हैं, जो हिंसा त्याग दे।"
सिंह ने कहा, "जम्मू एवं कश्मीर में पिछले कुछ हफ्तों से जारी अशांति चिंता का विषय है। कश्मीर के युवा हमारे नागरिक हैं और उनकी शिकायतें दूर होनी चाहिए।"
उन्होंने कहा, "हमें बेहतर सेवाएं देने और राज्य की जनता की आर्थिक तरक्की के लिए अवसर तैयार करने होंगे।"
प्रधानमंत्री के इस बयान ने राजनीतिक हल्कों में इस बात की उम्मीदें पैदा कर दी हैं कि सीसीएस कई सारी पहलों पर निर्णय ले सकती है, जिसमें जम्मू एवं कश्मीर के शहरी इलाकों से सशस्त्र बल विशेषाधिकार कानून (एएफपीएसए) को हटाया जाना भी शामिल है।
नेशनल कांफ्रेंस (एनसी) के एक वरिष्ठ नेता ने आईएएनएस को बताया कि हाल की हिंसा में मारे गए लोगों के आश्रितों के लिए एक रोजगार पैकेज और राहत पैकेज पर सीसीएस और कैबिनेट द्वारा बाद में अंतिम निर्णय लिया जा सकता है।
प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) के एक अधिकारी ने कहा कि सीसीएस की बैठक सोमवार की शाम आयोजित हो सकती है।
सीसीएस के अध्यक्ष प्रधानमंत्री हैं। इसके अलावा इसमें रक्षा मंत्री ए.के.एंटनी, गृह मंत्री पी.चिदंबरम, वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी और विदेश मंत्री एस.एम.कृष्णा शामिल हैं।
इससे पहले जम्मू एवं कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने सोमवार की सुबह केन्द्रीय गृह मंत्री पी. चिदम्बरम और संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) की अध्यक्ष सोनिया गांधी से मुलाकात की और उन्हें घाटी के घटनाक्रमों से अवगत कराया।
एनसी के एक वरिष्ठ नेता ने आईएएनएस को बताया कि मुख्यमंत्री ने राज्य के शहरी इलाकों से एएफपीएसए को हटाए जाने का आग्रह दुहराया है। एनसी नेता ने कहा, "मुख्यमंत्री चाहते हैं कि एक राजनीतिक पहल शुरू हो।"
लेकिन भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने जम्मू एवं कश्मीर के किसी भी हिस्से से एएफपीएसए को हटाए जाने का विरोध किया है।
भाजपा प्रवक्ता रवि शंकर प्रसाद ने रविवार को संवाददाताओं से कहा था, "इस तरह का कोई भी कदम राज्य में तैनात सुरक्षा बलों को हतोत्साहित करेगा।"
भाजपा के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी की अध्यक्षता में रविवार को यहां हुई पार्टी के शीर्ष नेताओं की एक बैठक में मांग की गई कि मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला को हटा कर किसी अधिक लोकप्रिय व्यक्ति को राज्य का मुख्यमंत्री बनाया जाए।
दिल्ली में ये सारे घटनाक्रम ऐसे समय में घट रहे हैं, जब कश्मीर में लगातार दूसरे दिन सोमवार को कर्फ्यू लागू है और एक ईरानी चैनल द्वारा प्रसारित उस खबर के बाद सड़कों पर विरोध प्रदर्शन फूट पड़े हैं, जिसमें अमेरिका में कुरान को अपवित्र किए जाने की खबर दी गई है।
इसके साथ ही कश्मीर में तीन और लोगों के मारे जाने के बाद घाटी में 11 जून से जारी हिंसा में मरने वालों की संख्या बढ़ कर 73 हो गई है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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