रिजवानुर मामले की दोबारा जांच पर रोक

नई दिल्ली। सर्वोच्च न्यायालय ने रिजवानुर रहमान की रहस्यमय मौत और आरोप पत्र को रफा-दफा किए जाने की दोबारा जांच किए जाने के कलकत्ता उच्च न्यायालय के आदेश पर शुक्रवार को रोक लगा दी। ज्ञात हो कि उच्च न्यायालय ने 18 मई को सीबीआई को निर्देश दिया था कि वह रिजवानुर रहमान के मौत की फिर से जांच करे और उसे हत्या का मामला माने।

न्यायाधीश पी. सथशिवम और न्यायाधीश बी. सी. चौहान की खण्डपीठ ने रिजवानुर मामले की नए सिरे से जांच करने संबंधी उच्च न्यायालय के फैसले से जुड़े सभी कांसेक्वेंसियल आदेशों पर भी रोक लगा दी। इस मामले में कांसेक्वेंसियल आदेशों का अर्थ रिजवानुर रहमान के ससुर व उद्योगपति अशोक टोडी और अन्य को निचली अदालत द्वारा आरोप मुक्त करना और उनकी जमानत राशि जारी करना है।

सर्वोच्च न्यायालय ने निचली अदालत को निर्देश दिया कि वह अशोक टोडी और अन्य आरोपियों के जमानत बांडों को उनकी संतुष्टि के लिए नवीनीकृत कर दे। लेकिन सर्वोच्च न्यायालय ने निचली अदालत को कहा कि जब तक उच्च न्यायालय के आदेश को चुनौती देने वाली सीबीआई की याचिका पर फैसला नहीं हो जाता, तब तक मुकदमे की कार्यवाही आगे न बढ़ाई जाए।

सर्वोच्च न्यायालय ने यह आदेश तब दिया है, जब महान्यायाधिवक्ता गोपाल सुब्रमण्यम ने अदालत को बताया कि पूरा मामला निर्थक है, क्योंकि उच्च न्यायालय ने कहा है कि सीबीआई द्वारा की गई पूर्व जांच अपराध दंड संहिता (सीआरपीसी) के तहत नहीं है।

सुब्रमण्यम ने कहा कि देश में कोई भी जांच एजेंसी ऐसी नहीं है जो सीआरपीसी के बाहर जा सके। सुब्रमण्यम ने उच्च न्यायालय के उस आदेश पर आपत्ति खड़ी की, जिसमें सीबीआई को नई प्राथमिकी दर्ज करने और मामले की नए सिरे से जांच करने के लिए कहा गया है। टोडी ने भी उच्च न्यायालय के आदेश के खिलाफ सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती दी थी। ज्ञात हो कि रिजवानुर ने अशोक टोडी की पुत्री प्रियंका से विवाह किया था और एक महीने के भीतर ही उसका शव रेल पटरी पर पाया गया था।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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