'पुलिसकर्मियों की रिहाई को नितीश सरकार अपनी जीत ना समझे'
पटना। सोमवार सुबह नक्सलियों द्वारा तीनों बंधक पुलिसकर्मियों की रिहाई के बाद राज्य की विपक्षी पार्टियों लोजपा और राजद का कहना है कि राज्य सरकार इसे अपनी जीत न समझे।
लोजपा के अध्यक्ष पासवान ने पुलिसकर्मियों की रिहाई पर खुशी जताते हुए कहा कि इन्हें पुलिस ने नहीं छुड़ाया बल्कि नक्सलियों ने खुद इन्हें छोड़ा। उन्होंने इसे नक्सलियों की उदारता बताते हुए कहा कि नक्सली जब चाहते इन्हें मार देते और ऐसे में सरकार इसे अपनी जीत ना समझे।
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उन्होंने कहा, "सर्वदलीय बैठक के बाद नक्सलियों ने लोगों को छोड़ने की पहल की। अगर घटना के तुरंत बाद सर्वदलीय बैठक बुलाई जाती तो रिहाई में इतना समय नहीं लगता। राज्य में खुफिया तंत्र पूरी तरह विफल हो गया है। नक्सलियों ने पुलिसकर्मियों को जंगल में बंधक बनाकर रखा था लेकिन पुलिस को इसकी भनक तक नहीं लगी। जब नीतीश कुमार की सरकार बनी थी तो राज्य के छह जिले नक्सल प्रभावित थे और आज 32 जिले नक्सल प्रभावित हैं। "
वहीं लालू प्रसाद यादव का भी यही कहना है कि राज्य सरकार बंधक पुलिसकर्मियों की रिहाई का ना ले। लालू ने पटना में संवाददाताओं कहा, "इस मामले में कोई क्रेडिट ना ले। इसके लिए पुलिस, सभी दलों के सदस्यों, मीडिया और बुद्घिजीवियों ने अपील की थी जिसके कारण मानवीयता दिखाते हुए नक्सलियों ने बंधकों को रिहा किया। इसमें सरकार और पुलिस का कोई रोल नहीं है। "












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