खाद्यान्न भंडारण पर सुझावों का पालन नहीं किया जा सकता : सरकार (लीड-1)
सरकार ने कहा कि खरीददारी नीति के दो उद्देश्य होते हैं। पहला, किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य उपलब्ध कराना और दूसरा, सार्वजनिक वितरण प्रणाली के लिए खाद्यान्न उपलब्ध कराना।
सरकार ने अदालत को बताया कि यदि केंद्र व राज्यों की एजेंसियां खरीददारी के चरम अवधि के दौरान किसानों के उत्पाद नहीं खरीदती हैं, तो किसान व्यापारियों के रहम पर रह जाएंगे और उन्हें अपने उत्पाद का उचित मूल्य नहीं मिल पाएगा।
ऐसे में किसान इस तरह की फसलों की खेती के प्रति उदासीन होंगे, परिणामस्वरूप राष्ट्र की खाद्य सुरक्षा पर बुरा असर पड़ेगा।
केंद्र सरकार ने एक विस्तृत हलफनामे में अदालत को ये बातें ऐसे समय में बताई हैं, जब अदालत ने इसके पहले सरकार को निर्देश दिया था कि वह अपनी खरीददारी एवं भंडारण नीति तथा गरीबी रेखा के नीचे (बीपीएल) के लोगों, गरीबी रेखा के ऊपर (एपीएल) के लोगों व अंत्योदय अन्न योजना (एएवाई) के लाभार्थियों के लिए सार्वजनिक वितरण प्रणाली पर जानकारी उपलब्ध कराए।
न्यायमूर्ति दलवीर भंडारी और न्यायमूर्ति दीपक वर्मा की खण्डपीठ के समक्ष दायर एक विस्तृत हलफनामे में सरकार ने कहा कि गरीबी रेखा के नीचे (बीपीएल) के लोगों तथा अंत्योदय अन्न योजना (एएवाई) के लाभार्थियों की जरूरतें पूरी करने बाद ही सरकार गरीबी रेखा के ऊपर (एपीएल) के लोगों को खाद्यान्न मुहैया करा रही है।
अदालत ने सरकार को यह निर्देश 31 अगस्त को तब दिया था, जब वह पीपुल्स यूनियन फॉर सिविल लिबर्टीज (पीयूसीएल) की ओर से दायर एक याचिका की सुनवाई कर रही थी।
पीयूसीएल ने अपनी याचिका में कहा था कि खराब भंडारण व्यवस्था तथा पीडीएस में भ्रष्टाचार के कारण खाद्यान्न सड़ रहे हैं।
सरकार के हलफनामे में सीधे तौर पर ऐसा कुछ नहीं कहा गया है, लेकिन उसमें स्पष्ट किया गया है कि वह सर्वोच्च न्यायालय के उस सुझाव पर गौर करने को तैयार नहीं है, जिसमें गरीबों को मुफ्त अनाज बांटने के लिए कहा गया है।
सरकार ने कहा कि एएवाई के तहत गेहूं पर 87.05 प्रतिशत की सब्सिडी है, जबकि चावल पर 72.35 प्रतिशत की सब्सिडी है। यहीं पर बीपीए कार्डधारकों के लिए गेहूं व चावल पर क्रमश: 73.12 प्रतिशत और 72.35 प्रतिशत की सब्सिडी है।
सरकार ने कहा कि कार्डधारकों की एपीएल श्रेणी को समाप्त करना खाद्य सुरक्षा कानून के मद्देनजर उचित नहीं है। सरकार ने कहा कि राष्ट्रीय सलाहकार परिषद खाद्य सुरक्षा के पूरे मामले का परीक्षण कर रहा है।
उपभोक्ता मामलों, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय के संयुक्त सचिव सी.विश्वनाथ ने यह हलफनामा दायर किया।
इसके पहले एक अदालत आयुक्त ने अपनी रिपोर्ट में अदालत को बताया कि सरकारी गोदामों में 50,000 टन गेहूं पहले ही खराब हो चुका है और वह मनुष्य के खाने लायक नहीं रह गया है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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