मुफ्त अनाज संभव नहीं, चीन से सावधानी जरूरी : प्रधानमंत्री (राउंडअप)
प्रधानमंत्री ने अपने सरकारी आवास पर सोमवार को संपादकों के एक समूह के साथ मुलाकात के दौरान तमाम मुद्दों पर बेबाकी से अपनी राय रखी। उन्होंने सरकार से लेकर संगठन, नक्सलवाद से लेकर कश्मीर समस्या, पाकिस्तान से लेकर चीन के साथ संबंधों और सेवानिवृत्त होने की अपनी योजनाओं तथा कैबिनेट में युवाओं को तरजीह देने के मुद्दे पर खुलकर अपनी बात कही।
प्रधानमंत्री से बातचीत के दौरान छनकर आईं खबरें इस प्रकार हैं:-
मुफ्त अनाज बांटना व्यावहारिक नहीं :-
सर्वोच्च न्यायालय के हाल के उस फैसले पर, जिसमें केंद्रीय कृषि मंत्री शरद पवार को दिए अपने आदेश में कहा था कि सड़ने की बजाए अनाजों को गरीबों में बांट दिया जाना चाहिए, प्रधानमंत्री ने सवालिया अंदाज में कहा, "देश में गरीबी रेखा के नीचे रहने वाले अनुमानित 37 फीसदी लोगों के बीच कैसे मुफ्त अनाज बांटा जा सकता है?"
प्रधानमंत्री ने कहा कि उन्होंने अभी तक अदालत के आदेश की प्रति देखी नहीं है लेकिन सभी गरीबों के बीच अनाज बांटना संभव नहीं है।
उन्होंने कहा कि अदालत के इस फैसले के पीछे की भावना का वह सम्मान करते हैं। उन्होंने आश्वासन दिया कि अनाज जब सड़ रहे हों, ऐसे में जरूरतमंदों तक उसे पहुंचाना सुनिश्चित करने के लिए हमें एक रास्ता निकालना होगा।
उन्होंने कहा, "मैं समझता हूं कि गरीबी रेखा के नीचे रहने वाले लोगों को रियायती दर पर अनाज मिलना चाहिए। वर्ष 2004 से गरीबी रेखा के नीचे रहने वाले लोगों के लिए खाद्यान्न की प्रारंभिक कीमतों में हमने कोई वृद्धि नहीं की है।"
प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार ने गरीबों को रियायती दर में अनाज उपलब्ध कराने के लिए पर्याप्त कदम उठाए हैं।
उन्होंने कहा कि गरीबों को मुफ्त अनाज उपलब्ध कराए जाने से किसानों को अधिक से अधिक उत्पादन के लिए प्रोत्साहन नहीं मिलेगा। ऐसे में जब अनाज उपलब्ध नहीं होगा तो फिर बांटने के लिए कुछ रहेगा ही नहीं।
सरकार व संगठन में तालमेल का अभाव नहीं :-
कांग्रेस में सरकार और संगठन के बीच घटते तालमेल की अटकलों को खारिज करते हुए प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह कहा है कि विचारों में मतभेद में कोई बुराई नहीं है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार में शामिल मंत्रियों और पार्टी नेताओं की अलग-अलग राय में कुछ भी गलत नहीं है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में विचारों में मतभेद होते हैं और कुछ हद तक सामंजस्य के साथ सरकार के काम करने के लिए यह जरूरी भी है।
उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि उनके मंत्रिमंडल ने जवाहरलाल नेहरू के नेतृत्व वाले मंत्रिमंडल से भी कहीं ज्यादा तालमेल के साथ काम किया है। प्रधानमंत्री ने इस बात का उल्लेख किया कि नेहरू और तत्कालीन उप प्रधानमंत्री सरदार पटेल के बीच तकरीबन रोजाना पत्रों का आदान-प्रदान होता था। सिंह ने इंदिरा गांधी और मोरारजी देसाई के बीच मतभेदों का हवाला देते हुए कहा कि विचारों में भिन्नता बुरी बात नहीं है।
अभी सेवानिवृत्त नहीं :-
प्रधानमंत्री ने कहा कि वह फिलहाल सेवानिवृत्त होने का मन नहीं बना रहे हैं। उन्होंने संसद के शीतकालीन सत्र से पहले मंत्रिमंडल के विस्तार के भी संकेत दिए। शीतकालीन सत्र सात नवंबर से शुरू होगा।
नक्सल समस्या का तत्काल समाधान नहीं :-
नक्सल समस्या की ओर इशारा करते हुए प्रधानमंत्री ने इसे देश की सुरक्षा के लिए सबसे बड़ी चुनौती करार दिया। उन्होंने कहा कि इसका तत्काल समाधान नहीं है। इस समस्या के लिए उन्होंने आर्थिक और सामाजिक कारण बताए।
कैबिनेट समिति में कश्मीर मसले पर चर्चा:-
मनमोहन सिंह ने कहा कि सुरक्षा मामलों की कैबिनेट समिति (सीसीएस) की इस सप्ताह के अंत में बैठक होगी, जिसमें जम्मू एवं कश्मीर की मौजूदा परिस्थितियों पर चर्चा की जाएगी। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इस संकट के समाधान के लिए किसी चमत्कार की अपेक्षा नहीं की जानी चाहिए।
प्रधानमंत्री ने कहा, "कश्मीर घाटी की वर्तमान परिस्थिति पर जल्द ही सीसीएस की बैठक बुलाई जाएगी।"
उन्होंने कहा, "मैं आपको यह वादा नहीं कर सकता कि मैं अपनी टोपी से खरगोश निकालने का चमत्कार करूंगा। देश को धर्य बनाए रखना सीखना चाहिए।"
घाटी में गत 11 जून से व्याप्त अशांति की ओर इशारा करते हुए प्रधानमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि उपद्रवियों को नियंत्रित करने के लिए अलग दृष्टिकोण अपनाना होगा। घातक हथियारों की जगह मानवीय तौर तरीकों को अपनाना होगा।
प्रधानमंत्री ने जम्मू एवं कश्मीर पुलिस को और अधिक शक्तियां प्रदान करने की वकालत की। "कभी-कभी यह कारगर साबित होता है तो कभी-कभी यह असरहीन भी होता है।"
मनमोहन सिंह ने स्वीकार किया कि जम्मू एवं कश्मीर में आतंकवाद कम हुआ है लेकिन अन्य मुद्दे अभी भी बरकरार है।
उन्होंने कहा कि कश्मीर समस्या पिछले 63 वर्षो से बनी हुई है। पंडित जवाहरलाल नेहरू, इंदिरा गांधी और राजीव गांधी जब देश के प्रधानमंत्री थे तो सभी ने इस समस्या के समाधान की कोशिश की। "हम अभी भी इस संकट का समाधान ढूंढ रहे हैं।"
चीन से एहतियात, पाक से वार्ता की जरूरत :-
चीन के साथ संबंधों में आई कड़वाहट के बीच प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने सोमवार को कहा कि भारत को चीन से पर्याप्त एहतियात बरतने की जरूरत है लेकिन इसका यह मतलब नहीं है कि संबंधित मुद्दों के शांतिपूर्ण समाधान की कोशिशें छोड़ दी जाए।
उन्होंने कहा कि दोनों एशियाई शक्तियों के संबंध सहयोग और प्रतिस्पर्धात्मक हैं लेकिन यह प्रतिस्पर्धा शांतिपूर्ण हो, इसके प्रयास किए जाने चाहिए।
प्रधानमंत्री ने कहा कि वह चीनी राष्ट्रपति हू जिंताओ और प्रधानमंत्री वेन जियाबाओ के साथ काम कर चुके हैं।
प्रधानमंत्री ने पाकिस्तान के साथ भी संबंधों में मधुरता बनाए रखने के लिए वार्ता जारी रखने की वकालत करते हुए कहा, "भारत-पाक संबंधों में हमेशा कोई न कोई दुर्घटना होती रहती है।" उन्होंने यह भी कहा कि मुंबई हमले के बाद उभरे जनमानस के विचारों के प्रति वह संवेदनशील हैं।
उन्होंने कहा कि वार्ता जारी रखना ही दोनों देशों के संबंधों को आगे ले जाने का एकमात्र रास्ता है। उन्होंने उम्मीद जताई कि पाकिस्तानी विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी भारतीय विदेश मंत्री एस. एम. कृष्णा के भारत आने के निमंत्रण को स्वीकार करेंगे।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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