कैबिनेट समिति में कश्मीर मसले पर चर्चा होगी : प्रधानमंत्री
अपने सरकारी आवास पर संपादकों के एक समूह के साथ मुलाकात के दौरान प्रधानमंत्री ने कहा, "कश्मीर घाटी की वर्तमान परिस्थिति पर जल्द ही सीसीएस की बैठक बुलाई जाएगी।"
उन्होंने कहा, "मैं आपको यह वादा नहीं कर सकता कि मैं अपनी टोपी से खरगोश निकालने का चमत्कार करूंगा। देश को धर्य बनाए रखना सीखना चाहिए।"
घाटी में गत 11 जून से व्याप्त अशांति की ओर इशारा करते हुए प्रधानमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि उपद्रवियों को नियंत्रित करने के लिए अलग दृष्टिकोण अपनाना होगा। घातक हथियारों की जगह मानवीय तौर तरीकों को अपनाना होगा।
प्रधानमंत्री ने जम्मू एवं कश्मीर पुलिस को और अधिक शक्तियां प्रदान करने की वकालत की। "कभी-कभी यह कारगर साबित होता है तो कभी-कभी यह असरहीन भी होता है।"
मनमोहन सिंह ने स्वीकार किया कि जम्मू एवं कश्मीर में आतंकवाद कम हुआ है लेकिन अन्य मुद्दे अभी भी बरकरार है।
उन्होंने कहा कि कश्मीर समस्या पिछले 63 वर्षो से बनी हुई है। पंडित जवाहरलाल नेहरु, इंदिरा गांधी और राजीव गांधी जब देश के प्रधानमंत्री थे तो सभी ने इस समस्या के समाधान की कोशिश की। "हम अभी भी इस संकट का समाधान ढूंढ रहे हैं।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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