एंटीबॉयोटिक्स बनाने की कला 2000 साल पुरानी
वाशिंगटन, 6 सितम्बर (आईएएनएस)। प्राचीन नूबियन्स (उत्तरी सूडान और दक्षिणी मिस्र में रहने वाले जनजातीय लोग) नियमित रूप से एंटीबायोटिक टेट्रासाइक्लिन लेते थे। वे ज्यादातर बीयर के साथ इसे लेते थे। उनकी हड्डियों के रासायनिक विश्लेषण में इसका पता चला है।
अब तक ऐसा माना जाता था कि 1928 में पेनिसिलीन के आविष्कार के साथ एंटीबॉयोटिक्स बनाने की कला विकसित हुई लेकिन अब इस खोज से लगता है कि करीब 2,000 साल पहले से ही एंटीबॉयोटिक्स का इस्तेमाल होता आया है।
टेट्रासाइक्लिन एक प्रकार का एंटीबॉयोटिक है। मूत्र वाहिनी में संक्रमण सहित अन्य प्रकार के संक्रमणों और मुहासों के इलाज के लिए इसका इस्तेमाल किया जाता है।
अमेरिका के इमोरी विश्वविद्यालय के शोधकर्ता जॉर्ज आर्मेलेगो और 'पारटेक फार्मास्यूटिकल्स' के दवा विक्रेता मार्क नेल्सन ने 'अमेरिकन जर्नल ऑफ फीजिकल एन्थ्रोपोलॉजी' में इस शोध की जानकारी दी।
आर्मेलेगो कहते हैं कि इस शोध से स्पष्ट है कि प्रागैतिहासिक काल के ये लोग एंटीबॉयोटिक्स का इस्तेमाल करते थे। उन्होंने 1980 में 350 और 550 ईसवी के मानवों की हड्डियों में टेट्रासाइक्लीन के अंश देखे थे। इस आबादी के कोई लिखित दस्तावेज नहीं हैं।
इंडो-एसियन न्यूज सर्विस।












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