बंधक पुलिसकर्मी मुक्त, परिजनों में खुशी की लहर (लीड-3)

पटना/बेगूसराय, 6 सितम्बर (आईएएनएस)। बिहार में बीते 29 अगस्त को नक्सलियों द्वारा बंधक बनाए गए तीनों पुलिसकर्मी सोमवार को मुक्त हो गए। इस मामले में सात संदिग्ध नक्सलियों को भी गिरफ्तार किया गया है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने पुलिसकर्मियों की रिहाई पर संतोष जताया है।

पुलिस के अनुसार सुबह तीनों पुलिसकर्मी रूपेश कुमार सिन्हा, अभय यादव तथा एहतशाम खान को लखीसराय जिले के चानन और कजरा थाना क्षेत्र की सीमा पर बसे लाखोचक गांव से रिहा कराया गया है। पुलिस ने बताया कि तीनों पुलिसकर्मी स्वस्थ एवं सकुशल हैं हालांकि वे सभी तनाव में जरूर हैं। पुलिस सूत्रों के मुताबिक रिहा पुलिसकर्मियों की सबसे पहले स्वास्थ्य की जांच कराई जाएगी।

इधर, राज्य के पुलिस महानिदेशक नीलमणि ने बताया कि श्रृंगी ऋषि पहाड़ी क्षेत्र से इन तीनों बंधकों को मुक्त कराया गया। उन्होंने कहा कि पुलिस के तलाशी अभियान के कारण नक्सली घिर गए थे। नीलमणि के मुताबिक इस मामले में सात नक्सलियों को भी गिरफ्तार किया गया है जिनमें प्रतिबंधित संगठन भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) का एक स्वयंभू एरिया कमांडर भी शामिल है।

इसबीच पटना में एक संवाददाता सम्मेलन में मुख्यमंत्री ने सोमवार को कहा, "इस रिहाई में बुद्घिजीवियों, पत्रकारों, सभी राजनीतिक दलों के लोगों, अधिकारियों तथा पुलिस सभी ने अपनी-अपनी भूमिका निभाई। यही कारण है कि बंधक बनाए गए पुलिसकर्मी रिहा हो सके। "

नीतीश ने कहा, "मैं आज नक्सलियों से अपील करता हूं कि हिंसा से कोई कुछ हासिल नहीं कर सकता। भारत जैसे देश में हिंसा के जरिए सत्ता पर नहीं काबिज हुआ जा सकता। नक्सलियों को हिंसा त्यागने में देरी नहीं करनी चाहिए। कुछ दिनों में बिहार में चुनाव होने वाला है, यहीं से उन्हें इसकी शुरुआत कर देनी चाहिए। "

विपक्षी नेताओं ने भी तीनों बंधकों की रिहाई पर खुशी जाहिर की लेकिन वे नीतीश सरकार पर निशाना साधने से भी नहीं चूके। राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के अध्यक्ष एवं पूर्व रेल मंत्री लालू प्रसाद ने बंधक पुलिसकर्मियों की रिहाई के बाद कहा कि इसका श्रेय किसी को नहीं लेना चाहिए।

लालू ने पटना में संवाददाताओं कहा, "इस मामले में कोई क्रेडिट ना ले। इसके लिए पुलिस, सभी दलों के सदस्यों, मीडिया और बुद्घिजीवियों ने अपील की थी जिसके कारण मानवता के हित में नक्सलियों ने बंधकों को रिहा किया। इसमें सरकार और पुलिस का कोई रोल नहीं है। "

लोक जनशक्ति पार्टी (लोजपा) के अध्यक्ष एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान ने कहा कि राज्य सरकार इसे अपनी जीत न समझे। पासवान ने पुलिसकर्मियों की रिहाई पर खुशी जताते हुए कहा कि इन्हें पुलिस ने नहीं छुड़ाया बल्कि नक्सलियों ने खुद इन्हें छोड़ा। उन्होंने इसे नक्सलियों की उदारता बताते हुए कहा कि नक्सली जब चाहते इन्हें मार देते। उन्होंने कहा कि ऐसे में सरकार इसे अपनी जीत ना समझे।

पुलिसकर्मियों की रिहाई के बाद बंधक पुलिसकर्मियों के घरों में खुशी की लहर दौड़ गई। रिहा पुलिसर्मी अभय यादव की पत्नी रजनी देवी अपने पति और उनके मित्रों की रिहाई से बेहद खुश हैं। वह कहती हैं कि भगवान ने उनकी सुन ली। बेगूसराय निवासी अभय की पत्नी इन दिनों अपने मायके खगडिया में हैं। उन्होंने कहा, "भगवान ने मेरी सुन ली और आज मेरे पति रिहा हो गए और अब मेरे पास आ जाएंगे। आखिरकार भगवान वासुदेव ने मेरी प्रार्थना सुन ली।"

बीते 29 अगस्त को लखीसराय के कजरा थाना क्षेत्र में हुई पुलिस और नक्सलियों के बीच मुठभेड़ के बाद चार पुलिसकर्मियों को बंधक बना लिया गया था। बंधक पुलिसकर्मियों में रूपेश कुमार सिन्हा (बेतिया), अभय यादव (बेगूसराय) तथा एहतशाम खान (मांडर, रांची) शामिल थे। इससे पहले नक्सलियों ने एक अन्य पुलिसकर्मी लुकस टेटे की नक्सलियों ने हत्या कर दी थी।

इस मुठभ्ेाड़ में सात पुलसकर्मी शहीद हो गए थे तथा सात से ज्यादा घायल हो गए थे। बंधक बनाए गए पुलिसकर्मियों को छुड़ाने के लिए लगातार पुलिस द्वारा तलाशी अभियान चलाया गया। नीतीश की अध्यक्षता में शनिवार को सर्वदलीय बैठक भी बुलाई गई थी। नक्सलियों ने बंधकों की रिहाई के लिए राज्य की विभिन्न जेलों में बंद अपने आठ साथियों की रिहाई की मांग की थी।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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