सोनिया ने कांग्रेस को पराजय के गर्त से निकाला
जार्ज जोसेफ/टी.जी.बीजू
नई दिल्ली, 3 सितम्बर (आईएएनएस)। एक विदेशी के रूप में बुलाई जाने वाली सोनिया गांधी ने देश में राजनीति के शिखर पर पहुंचने के रास्ते में तमाम विषम परिस्थितियों का सामना किया। उन्होंने देश की सबसे पुरानी राजनीतिक पार्टी को गर्त से उठाकर वापस खड़ा करने में मदद की।
सोनिया के आलोचक उन्हें सत्ता की भूखी बताते थे। लेकिन दुनिया के सबसे बड़े लोकतांत्रिक देश में प्रधानमंत्री का पद ठुकरा कर उन्होंने सबको चकित कर दिया था।
इस प्रक्रिया में 63 वर्षीय सोनिया गांधी शुक्रवार को चौथी बार कांग्रेस की अध्यक्ष चुनी गई हैं। इस तरह अब उन्हें दुनिया में अति ताकतवर और प्रभावशाली महिलाओं में गिना जाने लगा है।
भारत के अप्रत्याशित राजनीतिक मानकों के बावजूद गांधी ने चमत्कारिक रूप से प्रगति की है।
कांग्रेस पार्टी के सचिव मोहन प्रकाश ने आईएएनएस को बताया, "सोनियाजी भले ही इटली में पैदा हुई हैं, लेकिन वह तमाम नेताओं से कहीं अधिक भारतीय हैं। उन्होंने आधुनिक भारतीय राजनीति में एक पहचान छोड़ी है।"
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सरकार से बाहर रहते हुए भी सोनिया गांधी संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) का नेतृत्व कर रही हैं, जो कि 2004 से ही देश में राज कर रहा है।
पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की विधवा सोनिया को कांग्रेस नेतृत्व वाली संप्रग सरकार की गरीब समर्थक कार्यक्रमों, नीतियों के पीछे की प्रेरणा माना जाता है, जिसके कारण ही संप्रग 2009 में वापस सत्ता में लौट सका।
कांग्रेस सांसद मधु गौड़ याक्षी ने कहा, "सोनिया का नेतृत्व न केवल पार्टी के लिए जरूरी है, बल्कि देश के लिए भी। अब वह खाद्य सुरक्षा के लिए कानून बनवाने के लिए जुटी हुई हैं।"
कांग्रेस महासचिव जनार्दन द्विवेदी ने कहा, "हम सोनियाजी को 40 बार पार्टी प्रमुख बनाएंगे। यह हमारी पार्टी की पसंद है। दूसरों को इससे परेशान नहीं होना चाहिए।"
द्विवेदी ने सोनिया की तुलना जवाहरलाल नेहरू और इंदिरा गांधी से की।
सोनिया का जन्म इटली में तुरिन के पास ओरबासानो कस्बे में 9 दिसंबर 1946 को हुआ। एक बिल्डिंग ठेकेदार की संतान सोनिया कैंब्रिज में अंग्रेजी की पढ़ाई के दौरान राजीव से मिली थीं। वर्ष 1968 में दोनों ने शादी कर ली और इस तरह वह गांधी-नेहरू परिवार की बहू बन गईं।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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