मप्र ग्रामीण इलाकों में मात्र 12 घंटे बिजली आपूर्ति

प्रदेश में बिजली की मांग लगभग 5200 मेगावाट की है मगर उपलब्धता सिर्फ 4100 मेगावाट ही है। उपलब्धता और मांग के बीच 1100 मेगावाट का अंतर बना हुआ है और इसी के चलते बिजली कटौती का दौर जारी है। सरकारी आंकड़ों के मुकाबले ग्रामीण आबादी को सिर्फ 12 घंटे, तहसील स्तर पर 15 घंटे, जिला मुख्यालय पर 22 घंटे और संभाग मुख्यालय पर 23 घंटे बिजली की आपूर्ति की जा रही है।

प्रदेश की ताप विद्युत परियोजनाओं में कोयले की कमी और इकाइयों की गड़बड़ी के चलते क्षमता के अनुरूप उत्पादन नहीं हो पा रहा है, वहीं पानी की कमी के कारण चार बड़ी जल विद्युत परियोजनाओं में भी बिजली उत्पादन प्रभावित हो रहा है। जलविद्युत परियोजनाओं की कुल क्षमता 2446 मेगावाट है। इन इकाइयों में वर्तमान में 40 प्रतिशत से भी कम बिजली का उत्पादन हो पा रहा है।

ऊर्जा विभाग के सूत्रों का कहना है कि आने वाले समय में भी बिजली कटौती का यही दौर जारी रहेगा। वहीं विभाग किसानों को जरूरत के मुताबिक बिजली दिलाने के लिए फीडर विभक्तिकरण का अभियान चलाया हुआ है।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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