बंदर को लगा चश्मे का चस्का
शिमला, 3 सितम्बर (आईएएनएस)। हिमाचल प्रदेश में एक शरारती बंदर छुप-छुपकर लोगों के चश्मे चुराकर उन्हें सता रहा है। यह शौकीन बंदर मौका पाते ही चश्मा लेकर वहां रफूचक्कर हो जाता है।
प्रदेश के एक दफ्तर के कर्मचारी भी इस बंदर की शरारतों से तंग आ गए हैं। यह दफ्तर में भी घुसकर वहां से लोगों के चश्मे चुरा ले जाता है।
पिछले सप्ताह यह नटखट बंदर टुटीकांडी क्षेत्र में स्थित हिमाचल प्रदेश विद्युत निगम लिमिटेड (एचपीपीसीएल) के कार्यालय में घुस गया था और उसने वहां से पांच चश्मे चुरा लिए।
बंदर एचपीपीसीएल के निदेशक ए.सी. शर्मा का चश्मा भी उड़ा ले गया। वह दो दिन पहले दफ्तर के कक्ष में दाखिल हुआ था और उसने वहां रखी अन्य चीजों में कोई रुचि न दिखाते हुए मेज से केवल चश्मा ही चुराया।
एक अन्य कर्मचारी जगदीश चौधरी ने बताया कि यह बंदर जब चश्मा पहने हुए लोगों को देखता है तो उन पर झपट्टा मारता है।
दो बार तो बंदर ने लोगों के चश्मे कुछ इस तरह से चुराए कि उन्हें पता भी नहीं चला और वह चश्मे लेकर करीब के पेड़ों पर रफूचक्कर हो गया।
उन्होंने कहा, "यहां के कर्मचारियों के लिए वह सिरदर्द हो गया है। हम यहां आने वाले लोगों को सलाह दे रहे हैं कि वे चश्मे पहनकर न आएं।"
वैसे शिमला के जाखू पहाड़ी इलाके में स्थित हनुमान मंदिर में बंदरों के लोगों के चश्मे चुराकर उनसे खाने की वस्तुएं मांगने की घटनाएं सामान्य हैं।
वन्यजीव विभाग में पशु चिकित्सक संदीप रतन ने आईएएनएस से कहा, "ये नकल उतारना है और सामान्य रूप से वयस्क बंदरों में यह व्यवहार देखा जाता है। वे सामान्यतौर पर इसमें आनंद लेते हैं।"
उन्होंने कहा, "यदि हम वस्तुएं लौटाने के लिए उन्हें पुरस्कार के तौर पर खाने-पीने की चीजें देंगे तो वे ऐसे ही अवसर ढूंढ़ेंगे। उन्हें पुरस्कृत करने की बजाए डराना चाहिए।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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