मानव तस्करों के चंगुल से बचाए गए 24 भारतीय
मानव तस्करी में संलिप्तता के आरोप में दो पाकिस्तानियों को हिरासत में लिया गया है। यह जानकारी शुक्रवार को एक मीडिया रिपोर्ट में दी गई।
मलेशियाई पुलिस को भारत में 30 अगस्त को प्रसारित हुई एक मीडिया रिपोर्ट से भारतीय लोगों को बंधक बनाकर रखे जाने का सुराग मिला था। इसके बाद पिछले सोमवार को इपोह से 30 किलोमीटर दूर स्थित सुंगई सिपुट शहर से बंधकों को मुक्त करा लिया गया। वहां कम से कम 27 लोगों को बंधक बना कर रखा गया था।
समाचार पत्र 'न्यू स्ट्रेट्स टाइम्स' के मुताबिक पर्क स्थित आपराधिक जांच विभाग (सीआईडी) के प्रमुख डेजुरेडी इब्राहिम ने शुक्रवार को बताया कि भारतीय नागरिकों को पेनांग स्थित फैक्टरी में काम करने के लिए भेजने से पहले उनकी तस्करी के लिए उस घर के इस्तेमाल किए जाने का सुराग मिलने के बाद वहां छापा मारा गया था।
उनका कहना है, "जांच बताती है कि 20 से 30 वर्ष आयु के ये पुरुष उत्तर प्रदेश से हैं। ऐसा माना जा रहा है कि दो पाकिस्तानी आदमियों द्वारा जोहोर की एक फैक्टरी में काम करने के लिए ले जाए जाने से चार महीने पहले वे कुआलालंपुर अंतर्राष्ट्रीय हवाईअड्डे (केएलआईए) से होते हुए यहां आए थे।" उन्होंने यह भी बताया कि इन लोगों से अच्छी तनख्वाह मिलने का वादा किया गया था।
डेजुरेडी ने बताया कि पाकिस्तानी आदमियों से पूछताछ के दौरान पता चला है कि उन्होंने प्रत्येक भारतीय से उसे पेनांग ले जाने के लिए 96 डॉलर की मांग की थी।
उन्होंने बताया कि दोनों संदिग्धों की उम्र 25 और 34 वर्ष है, उन्हें एक सप्ताह के लिए हिरासत में लिया गया था और मानव-तस्करी विरोधी कानून की तहत उनसे पूछताछ की गई थी।
डेजुरेडी ने बताया कि इन सभी भारतीयों को स्वदेश भेजने से पहले उन्हें 14 दिन तक कुआलालंपुर अंतर्राष्ट्रीय हवाईअड्डे पर आव्र्जन डिपो में रखा जाएगा।
मलेशिया को दवाओं और मानव तस्करी का प्रमुख केंद्र माना जाता है। काम तलाश रहे आदमियों को यहां लाकर अन्य दक्षिणपूर्व एशियाई देशों और आस्ट्रेलिया के लिए उनकी तस्करी की जाती है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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