उत्तर प्रदेश: फिर एक तटबंध के टूटने का खतरा

उत्तराखण्ड स्थित बनबसा बैराज से काफी पानी छोड़े जाने और नेपाल की नदियों का जलस्तर बढ़ने से घाघरा के जलस्तर में जबरदस्त वृद्धि हुई है। बहराइच के जिला आपदा अधिकारी वीरेंद्र पांडे ने मंगलवार को संवाददाताओं को बताया कि तटबंध टूटने से बड़ी तबाही आ सकती है।
जहां पर तटबंध कटान से क्षतिग्रस्त हो रहा है, वहां पत्थर-बालू की बोरियां डाली जा रही हैं। हालात फिलहाल काबू में हैं। घाघरा के कहर से बहराइच में पहले ही करीब डेढ़ लाख लोग बेघर हो चुके हैं। महसी और कैसरगंज तहसील के करीब 80 गांव जलमग्न हो गए हैं और सैकड़ों एकड़ फसलें बाढ़ में डूबकर नष्ट हो चुकी है।
उन्होंने बताया कि प्रभावित इलाकों में लगातार राहत कार्य जारी है। राहत व बचाव कार्य में प्रशासन ने 265 नावें, 24 मोटर बोटों और प्रांतीय सशस्त्र बल (पीएसी) के जवानों की एक कंपनी को लगा रखा है। उधर, बाराबंकी में एल्गिन-चरसरी तटबंध टूटने से बाढ़ से घिरे गांवों के लोगों को सुरक्षति स्थानों पर पहुंचाया जा रहा है।
बाराबंकी के अपर जिलाधिकारी देवेंद्र पांडे ने बताया कि बाढ़ का पानी अब परसावलपुर गांव से सटे गोंडा जिले के सीमावर्ती गांवों में प्रवेश कर रहा है। करीब 20 गांव प्रभावित हुए हैं। प्रभावित गावों के लोगों को मोटर बोट व नावों की मदद से सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा रहा है।
पांडे ने कहा कि तटबंध में हो रहे कटान को रोकने के प्रयास लगातार किए जा रहे हैं। तटबंध टूटने से करीब 20,000 लोग प्रभावित हुए हैं। अधिकारियों का कहना है कि बाढ़ प्रभावित लखीमपुर खीरी, बहराइच, बाराबंकी जिलों में अब तक कुल सात मौतें हो चुकी हैं।
उधर शारदा, गंगा, यमुना और ताप्ती के जलस्तर में कुछ गिरावट दर्ज की जा रही है। पिछले 24 घंटों के दौरान राज्य के कुछ हिस्सों में हल्की और मध्यम बारिश हुई है। मौसम विभाग ने मंगलवार को राज्य के विभिन्न हिस्सों में हल्की बारिश की संभावना जताई है।












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