तमिलनाडु बस अग्निकांड में 3 की मौत की सजा बरकरार (लीड-1)
गौरतलब है कि इस हादसे में कृषि विश्वविद्यालय की तीन लड़कियां जिंदा जल गई थीं, जबकि अन्य घायल हो गए थे। एआईएडीएमके कार्यकर्ताओं ने कोडाइकनाल में प्लीजेंट स्टे होटल मामले में उनकी नेता जयललिता को आरोपी बनाए जाने के खिलाफ विरोध-प्रदर्शन के दौरान एक कालेज बस में आग लगा दी थी। उच्च न्यायालय ने इस मामले में तीनों दोषियों को मौत की सजा सुनाई थी।
सर्वोच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति पी. सथशिवम और न्यायमूर्ति बी.एस. चौहान की खंडपीठ ने कहा कि तीन छात्राओं की मौत 'असाधारण से असाधारण' श्रेणी में आती है। यह अच्छी तरह जानते हुए भी कि बस में सवार छात्र बाहर नहीं निकल पाएंगे, उनके बस पर मिट्टी का तेल डालने का मतलब है कि पूर्व निर्धारित योजना के अनुसार इस घटना को अंजाम दिया गया।
अदालत ने इस ओर भी ध्यान दिया कि बस में छात्राओं के साथ यात्रा कर रहे शिक्षकों की याचनाओं पर भी कोई ध्यान नहीं दिया गया था।
फैसला सुनाते हुए न्यायमूर्ति चौहान ने इस घटना को 'बर्बरतापूर्ण और अमानवीय कृत्य' बताया। फैसले में घटनास्थल पर मौजूद भीड़ तथा पुलिस द्वारा इस कृत्य को रोकने तथा लड़कियों को बचाने के लिए कोई पहल न करने की भर्त्सना भी की गई।
फैसले में कहा गया कि यदि पुलिस ने अपनी जवाबदेही सही ढंग से निभाई होती तो इन कीमती जानों को बचाया जा सकता था।
जिन लोगों को सजा सुनाई गई है, उनमें सी. मुनियप्पा, मधु उर्फ रवींद्रन तथा नेडु उर्फ नेडुनचेझियन शामिल हैं।
चेन्नई की अदालत ने फरवरी, 2000 में जयललिता एवं अन्य चार को एक वर्ष जेल की सजा सुनाई थी। जयललिता पर आरोप है कि 1991-96 में उनके मुख्यमंत्रित्व काल के दौरान उन्होंने अन्य चार लोगों की मदद से कोडाइकनाल में अनधिकृत रूप से सात मंजिली प्लीजेंट स्टे होटल बनवाया था।
हादसे में मारी गई हेमलता की मां के. कासियाम्मल ने कहा, "मैं सर्वोच्च न्यायालय के फैसले का स्वागत करती हूं। मुझे इस बात का दुख है कि न्याय मिलने में काफी वक्त लगा।"
कासियाम्मल ने चेन्नई के निकट संवाददाताओं से कहा कि वह आशा रखती हैं कि भविष्य में फिर कोई निर्दोष हिंसा का शिकार नहीं होगा। उन्होंने अपने पति आर. केसवचंद्रन को बधाई देते हुए कहा कि शुक्र है कि यह फैसला सुनने के लिए वह अभी जिंदा हैं।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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