एक दिन में 111 मामले निपटाने वाले जज से वकील नाराज
न्यायाधीश के इस तरह के कार्य से आम लोग तो बहुत खुश हैं लेकिन मंगलगिरी शहर के सिविल न्यायालय के वकील समुदाय का एक वर्ग उनसे खफा हो गया है।
कनिष्ठ सिविल जज जे. वी. वी. सत्यनारायण मूर्ति का कहना है कि वह वादियों को राहत दिलाने के लिए और मामलों के त्वरित निपटारे को लेकर प्रतिबद्ध हैं, लेकिन वकीलों ने उनसे कहा है कि इस गति से तो वे बेरोजगार हो जाएंगे।
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बार एसोसिएशन के एक अधिकरी ने बताया कि प्रत्येक पेशी के लिए 100 से 200 रुपये मेहताना कमाने वाले वकीलों के एक समूह ने उक्त न्यायाधीश से मिलकर काम करने की गति धीमी करने का आग्रह किया।
मंगलगिरी बार एसोसिएशन के संस्थापक अध्यक्ष ए. संजीव रेड्डी ने कहा कि वकीलों ने न्यायाधीश से कहा है कि यदि मुकदमों का निपटारा इसी गति से करते रहेंगे तो उनके फांके करने की नौबत आ जाएंगे।
न्यायाधीश ने कहा कि वह आपराधिक दंड प्रक्रिया संहिता के अनुरूप काम कर रहे हैं और उन पर कोई भी सवाल नहीं उठा सकता। उन्होंने कहा कि वकीलों के मेहनताने की खातिर वादियों को कष्ट झेलने के लिए विवश नहीं किया जा सकता।
गौरतलब है कि लगभग साढ़े तीन महीने के कार्यकाल के भीतर ही न्यायाधीश मूर्ति ने लगभग 500 मामलों का निपटारा किया है, जिनमें से 111 मामलों का निपटारा उन्होंने सिर्फ गुरुवार को ही किया।
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अदालत में अभी 1,000 और मामले लंबित हैं। पूरे देश की अदालतों में तकरीबन तीन करोड़ मामले लंबित हैं। उपभोक्ता अधिकारों से जुड़े कार्यकर्ता वर्धन राव ने कहा, "एक दिन में 111 मामलों का निपटारा करना केवल देश का ही रिकार्ड नहीं है बल्कि यह एक विश्व रिकॉर्ड है।"
उल्लेखनीय है कि कुछ समय पहले मुंबई के एक न्यायाधीश ने एक दिन में 80 मामलों का निपटारा कर रिकॉर्ड बनाया था।













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