'भारतीय मछुआरों की हिरासत का औचित्य साबित किया जाए'
डान न्यूज ने शुक्रवार को खबर दी है कि सर्वोच्च न्यायालय को गुरुवार को सूचित किया गया था कि 132 पाकिस्तानी मछुआरे भारत के कब्जे में हैं और भारत द्वारा जनवरी में किए गए दावे के अनुसार 582 भारतीय मछुआरे पाकिस्तानी जेलों में हैं।
प्रधान न्यायाधीश इफ्तिखार मोहम्मद चौधरी और न्यायमूर्ति खलीलुर रहमान रमादी की खण्डपीठ पाकिस्तान फिशर फोक फोरम, पाकिस्तान इंस्टीट्यूट ऑफ लेबर एजुकेशन एंड रिसर्च (पिलर), हिरासत में पांच मछुआरों और 24 अन्य कैदियों की ओर से दायर याचिका की सुनवाई कर रही थी।
विदेश मंत्रालय ने कहा कि जैसे ही भारतीय उच्चायोग से मछुआरों के यात्रा कागजात प्राप्त होंगे, उन्हें जल्द से जल्द भारत भेज दिया जाएगा।
याचियों की ओर से पेश होते हुए वरिष्ठ अधिवक्ता सैयद इकबाल हैदर ने कहा कि दो नाबालिगों सहित 454 मछुआरों का सत्यापन हो गया है और विदेश मंत्रालय ने संकेत दिया है कि उन्हें रिहा कर दिया जाना चाहिए, क्योंकि उन सभी के मामले में वाणिज्यदूत संबंधी प्रक्रिया पूरी हो चुकी है।
प्रधान न्यायाधीश ने कहा कि यद्यपि पाकिस्तान ने 100 से अधिक मछुआरों को रिहा कर दिया है, लेकिन भारत ने कुछ मछुआरों को ही रिहा किया। इसी कारण पाकिस्तानी अधिकारियों द्वारा भारतीय मछुआरों की जल्द रिहाई को लेकर समस्या पैदा हुई है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि हिरासत में लिए गए 584 भारतीय मछुआरों में से 456 ने अपनी सजा पूरी कर ली है और उनके मामले सर्वोच्च न्यायालय के संघीय समीक्षा बोर्ड के पास है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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