ज्ञानेश्वरी रेल दुर्घटना : मुख्य आरोपी मुठभेड़ में मारा गया (लीड-2)
पश्चिम बंगाल के पुलिस महानिदेशक(डीजीपी) भूपिंदर सिंह ने आईएएनएस को बताया कि उमाकांत महतो शुक्रवार तड़के झारग्राम के एक जंगल में मुठभेड़ में मारा गया।
महतो पुलिस संत्रास विरोधी जनसाधारण समिति (पीसीपीए) का नेता था। उसे ज्ञानेश्वरी रेल दुर्घटना मामले का मुख्य आरोपी माना जा रहा था।
पुलिस के अनुसार पांच घंटे चली मुठभेड़ गुरुवार देर रात 1.30 बजे माहनपुर जंगल में शुरू हुई। घटनास्थल से एक पिस्तौल और भारी संख्या में गोलियां मिली हैं। उसके सहयोगी फरार होने में सफल रहे।
संयुक्त सुरक्षा बल के नेतृत्व करने वाले झाराग्राम के पुलिस अधीक्षक प्रवीण त्रिपाठी ने बताया, "गुरुवार रात इस बारे में जानकारी मिली थी कि मोहनपुर क्षेत्र में नक्सली बैठक कर रहे हैं। पक्की सूचना के बाद हमने नक्सलियों के खिलाफ अभियान चलाया।"
इस अभियान का कॉम्बैट बटालियन फॉर रिजाल्यूट एक्शन(कोबरा)और संयुक्त सुरक्षा बलों के जवानों ने नेतृत्व किया।
त्रिपाठी ने बताया कि नक्सलियों को जैसे ही इस बात का आभास हुआ कि सुरक्षा बल उनके करीब आ रहे हैं, उन्होंने गोलीबारी शुरू कर दी। इसके बाद जवानों ने जवाबी गोलीबारी की। मुठभेड़ में एक नक्सली मारा गया जबकि अन्य फरार हो गए। स्थानीय लोगों ने मृतक की पहचान उमाकांत महतो के रूप में की।
ज्ञानेश्वरी एक्सप्रेस दुर्घटना की जांच कर रहे केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने पहले ही उमाकांत महतो के बारे में सूचना देने पर एक लाख रुपये का इनाम घोषित किया था।
महतो 28 मई को हुई रेल दुर्घटना के बाद से ही फरार था। आरोपियों ने पटरियों को क्षतिग्रस्त कर दिया था, जिससे मुंबई जा रही रेलगाड़ी पटरी से उतर गई थी। ज्ञानेश्वरी एक्सप्रेस के पलटने के थोड़ी ही देर बाद दूसरी ओर से आ रही एक मालगाड़ी पटरी से उतरे हुए डिब्बों से टकरा गई। इससे मरने वालों की संख्या काफी बढ़ गई। दुर्घटना में 148 लोग मारे गए थे।
इस घटना के एक अन्य संदिग्ध बापी महतो को पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है। मामले के तीसरे संदिग्ध असित महतो को पुलिस अभी गिरफ्तार नहीं कर पाई है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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