मदर टेरेसा के जन्मदिन पर 14, क्रीक लेन को भूले लोग
कोलकाता, 26 अगस्त (आईएएनएस)। एक ओर जहां मदर टेरेसा की जन्मशती पर गुरुवार को संपूर्ण विश्व उन्हें सलाम कर रहा है वहीं दूसरी ओर कोलकाता के उस तीन मंजिला घर को लोगों ने भुला दिया है जहां से उन्होंने 'मिशनरीज ऑफ चैरिटी' की यात्रा शुरू की थी।
इमारत का शीर्ष तल जहां मदर ने 'मिशनरीज ऑफ चैरिटी' की स्थापना की, वहां गुरुवार को ताला लगा हुआ था। न तो यहां कोई आगंतुक पहुंचा और न ही इस जर्जर इमारत पर ऐसी कोई पट्टिका थी जो यह याद दिलाती कि इसका इतिहास में महत्वपूर्ण स्थान है।
मध्य कोलकाता के 14, क्रीक लेन में किसी भी सामान्य दिन जैसा ही माहौल था।
फ्रांसिस राजू ने आईएएनएस को बताया, "हमारे यहां अब तक कोई आगंतुक नहीं आए। पहले हर दिन बहुत से लोग आते थे। जब 1997 में उनकी मृत्यु हुई थी तो उनके अनुयायियों और मीडिया की इतनी भीड़ रहती थी कि हमारे पास खाने और आराम करने तक का समय नहीं होता था।"
मदर को गिरजाघर से अपनी संस्था शुरू करने की इजाजत मिलने के बाद फ्रांसिस के नाना अल्फ्रेड गोम्स और उनके भाई माइकल गोम्स ने 1948 में उन्हें उनके घर के शीर्ष तल पर 'मिशनरीज ऑफ चैरिटी' की शुरुआत करने के लिए आमंत्रित किया था।
मदर 1948 से 1953 तक यहां रहीं। उन्होंने एक हॉल और उससे सटे चार कमरों में एक छोटा सा प्रार्थनालय बनाया।
फ्रांसिस की मां मारग्रेट ने आईएएनएस को बताया कि शुरुआती दिन संघर्ष से भरे हुए थे। वह बीमारों के लिए दवाएं खरीदती थीं लेकिन उनके पास पर्याप्त पैसा नहीं होता था और कई बार वह भूखे पेट ही सोती थीं।
उनकी लगन और काम से प्रभावित होकर नई युवा लड़कियां भी उनके साथ काम करने लगीं और उन्होंने 1950 में 12 सिस्टर्स के साथ 'मिशनरीज ऑफ चैरिटी' की स्थापना की।
'मिशनरीज ऑफ चैरिटी' से अधिक सिस्टर्स के जुड़ने के बाद उन्हें इसके लिए नई जगह तलाशनी पड़ी। उन्होंने 1953 में लोअर सर्कुलर रोड स्थित एक दो मंजिला मकान में इसे स्थानांतरित किया। अब इसे मदर हाउस कहते हैं और यह 'मिशनरीज ऑफ चैरिटी' का वैश्विक मुख्यालय है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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