वायुसेना में 2013 तक शामिल की जा सकती है ब्रह्मोस मिसाइल
वायुसेना के लिए इस मिसाइल के कम ऊंचाई पर उड़ने वाले और हवा से जमीन पर मार करने वाले संस्करण का परीक्षण 2012 में पूरा कर लिया जाएगा।
ब्रहोस एयरोस्पेस लिमिटेड (बीएएल) के मुख्य कार्यकारी अधिकारी और कार्यकारी निदेशक ए. एस. पिल्लै ने कहा, "हमें उम्मीद है कि इसे वायुसेना में 2013 तक शामिल कर लिया जाएगा।"
भारतीय नौसेना और थल सेना में ब्रह्मोस को पहले ही शामिल किया जा चुका है। यह मिसाइल 200-300 किलोग्राम विस्फोटक ले जाने में सक्षम है।
वायुसेना में इन मिसाइलों को सुखोई एसयू-30 एमकेआई विमान के जरिए छोड़ा जा सकेगा। इन विमानों को ब्रह्मोस की जरूरतों के हिसाब से संशोधित किया जा रहा है।
पिल्लै ने कहा, "इन विमानों में कुछ बदलाव किए जा रहे हैं।"
इन विमानों में बदलाव का यह काम बेंगलुरू स्थित हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड कर रही है। विमानों का वजन कम करने के लिए कुछ बदलाव किए जा रहे हैं।
विमान में बदलावों के प्रारूप का निर्माण और परीक्षण रूस में किया गया है।
पिल्लै ने कहा कि ब्रह्मोस का प्रक्षेपण जमीन से जहाज, जहाज से जमीन और जहाज से जहाज पर भी संभव है।
वायुसेना के उपयोग के लिए तैयार किए जा रहे इसके संशोधित संस्करण से यह आसमान से जमीन पर भी हमला करने में सक्षम हो जाएगी।
पिल्लै ने कहा कि पानी के अंदर हमला करने के लिए भी ब्रह्मोस का परीक्षण किया जा रहा है। उन्होंने कहा, "हम इसे पनडुब्बियों पर लगाने और जहाजों पर आक्रमण करने की संभावनाएं देख रहे हैं। इसके लिए प्रौद्योगिकी तैयार है लेकिन परीक्षण के लिए तैयारी की जा रही है।"
कई देशों ने ब्रह्मोस खरीदने में रुचि दिखाई है लेकिन पिल्लै का कहना है, "इसके निर्यात के लिए हमें तब तक इंतजार करना होगा जब तक भारतीय सेनाओं को यह पूरी तरह उपलब्ध नहीं हो जाती इसके बाद रूस की सेनाओं को इसे उपलब्ध कराया जाएगा।"
भारत-रूस अंतर-सरकारी आयोग ने इस मिसाइल के निर्यात को सैद्धांतिक मंजूरी दी है।
पिल्लै ने कहा कि हम रूस के सहयोग से ही एक हायपर-सोनिक मिसाइल के विकास की योजना पर काम कर रहे हैं यह ध्वनि की गति से पांच गुना तेज चलेगी। उन्होंने कहा कि इसके लिए अभी प्रौद्योगिकी का विकास किया जा रहा है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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