चिदम्बरम को कश्मीर से उम्मीद, नक्सली हिंसा से निराशा
राज्यों के पुलिस प्रमुखों और विभिन्न सुरक्षा एजेंसियों के प्रमुखों की बैठक के उद्घाटन संबोधन में चिदम्बरम ने कहा, "मुझे भय है कि जम्मू एवं कश्मीर अब पत्थराव, लाठीचार्ज, आंसू गैस के गोलों और गोलीबारी से होने वाली मौतों और इसके जवाब में और पथराव की एक श्रृंखला से घिर गया है।"
उन्होंने कहा, "मुझे विश्वास है कि अगले कुछ दिनों में ऐसी स्थिति तक पहुंचने में सफल होंगे जहां से हम प्रदर्शनकारियों तक पहुंच सकेंगे और उन्हें उनके अधिकारों और गरिमा के प्रति आश्वस्त कर शांति तथा कानून व्यवस्था बहाल कर वार्ता की प्रक्रिया फिर शुरू करेंगे जिससे एक हल निकलेगा।"
केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा कि राज्य में हिंसा का सिलसिला नहीं रुकने से चिंतित हैं। बहरहाल सुरक्षा बलों को संयम से काम करने का निर्देश दिया गया है।
नक्सलियों के साथ संघर्ष लंबा खिंचने की आशंका जताते हुए चिदम्बरम ने कहा कि संघर्ष को सुलझाने में धैर्य बहुत महत्वपूर्ण है।
उन्होंने कहा, "हमने राज्यों से नवम्बर 2009 में ही स्पष्ट कर दिया था कि भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) पर नियंत्रण करने और उनके हमलों को रोकने के वर्षो लगेंगे।"
चिदम्बरम ने कहा, "मेरे विचार से भारत के यह लोग समझते हैं कि नक्सलियों लंबा संघर्ष चलेगा और इसमें धर्य महत्वूपर्ण होगा।"
हिंसा का रास्ता छोड़कर वार्ता शुरू करने के केंद्र सरकार के आह्वान पर नक्सलियों की प्रतिक्रिया नहीं मिलने पर उन्होंने खेद जताया।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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