दार्जिलिंग में फिर मची उथल-पुथल

बीबीसी संवाददाता, कोलकाता से
चाय बागानों के लिए प्रसिद्ध भारत के पूर्वोत्तर शहर दार्जिलिंग में एक बार फिर माहौ तनावपूर्ण हो गया है. जिस व्यक्ति पर वरिष्ठ गोरखा नेता मदन तमांग की हत्या करने का संदेह है वह पुलिस हिरासत से फरार हो गया है. इसके विरोध में अखिल भारतीय गोरखा लीग ने दार्जिलिंग में बंद का आह्वान किया है.
उनकी मांग है कि जब तक निकोल तमांग को गिरफ़्तार नहीं कर लिया जाता, यह बंद जारी रहेगा. निकोल तमांग गोरखा जनमुक्ति मोर्चा के नेता हैं. उन्हें 16 अगस्त को दार्जिलिंग स्थित उनके पैतृक निवास से गिरफ़्तार किया गया था.
निकोल तमांग पर आरोप है कि वो अखिल भारतीय गोरखा लीग के चेयरमैन मदन तमांग की हत्या में शामिल हैं. उन्हें गोरखा जनमुक्ति मोर्चा सुप्रीमो बिमल गुरंग का नजदीकी माना जाता है.
मदन तमांग पर 21 मई को दार्जिलिंग शहर के 'प्लांटर्स क्लब' के सामने खुखरी से हमला किया गया था. इस हमले में उनकी मौत हो गई थी. मदन तमांग इसी स्थान पर अपने समर्थकों के साथ एक बैठक करने वाले थे. तमांग की अध्यक्षता वाली अखिल भारतीय गोरखा लीग की इस बैठक का गोरखा जनमुक्ति के कार्यकर्ता विरोध कर रहे थे.
पुलिस का कहना है कि निकोल तमांग हत्या करने के बाद नेपाल भाग गए. हत्या की जांच कर रही पश्चिम बंगाल सीआईडी ने 16 अगस्त को निकोल तमांग को हिरासत में ले लिया था. सीआईडी दार्जिलिंग के पिंतैल गांव में स्थित एक कैंप में रखकर उनसे पूछताछ कर रही थी.
पुलिस का कहना है कि निकोल तमांग कैंप में बने शौचालय में घुसने के बाद उसकी खिड़की से कूदकर भाग गए. पश्चिम बंगाल सीआईडी के महानिदेशक नीरज नयन पांडे ने कहा, "हमने कई जगहों पर उनकी तस्वीरें भेजी हैं और उन्हें पकड़ने की सभी कोशिशें जारी हैं. हिरासत से भागने के कारणों की हम पड़ताल कर रहे हैं."
पश्चिम बंगाल की वामपंथी सरकार भारत सरकार पर दबाव डाल रही है कि गोरखालैंड बनाने के मसले पर बातचीत के लिए आल इंडिया गोरखा लीग और डेमोक्रेटिक फ्रंट को भी वार्ता में शामिल किया जाए. अभी तक इस मसले पर चल रही बातचीत में सिर्फ़ तीन पक्ष ही शामिल हैं- भारतीय गृह मंत्रालय, पश्चिम बंगाल सरकार और गोरखा जनमुक्ति मोर्चा.












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