गिलानी ने वार्ता की पेशकश ठुकराई, मीरवाइज ने साधी चुप्पी

जम्मू एवं कश्मीर लिबरेशन फंट्र (जेकेएलएफ) ने चिदंबरम की पेशकश को 'सरासर पाखंड' बताया है। उसका कहना है कि वार्ता और हत्याएं साथ-साथ नहीं चल सकती।

गिलानी ने शुक्रवार देर शाम पत्रकारों से बातचीत में कहा, "मैं किसी भी तरह की वार्ता में हिस्सा लेने के पक्ष में तब तक नहीं हूं जब तक कि जम्मू एवं कश्मीर को विवादित क्षेत्र घोषित करके वहां से सेना को वापस नहीं बुलाया जाता और कश्मीर पर संयुक्त राष्ट्र में पारित प्रस्ताव को लागू नहीं किया जाता।"

गिलानी ने कहा कि कश्मीर पर उनके रुख में कोई बदलाव नहीं आया है। "गृह मंत्री की पेशकश को मैं खारिज कर रहा हूं। यह मुझे अलग-थलग करने और जारी विरोध प्रदर्शन को दबाने की साजिश है।"

चिदंबरम ने शुक्रवार को राज्यसभा में कहा था कि सरकार जम्मू एवं कश्मीर में राजनीतिक प्रक्रिया को दोबारा सक्रिय करने के लिए प्रतिबद्ध है और यदि कट्टरपंथी अलगाववादी नेता सैय्यद अली शाह गिलानी वार्ता में शामिल होते हैं तो 'बहुत खुशी' होगी।

राज्य की प्रमुख विपक्षी पार्टी पीपुल्स डेमोक्रेटिक फंट (पीडीपी) की अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती ने कहा कि किसी भी प्रकार की वार्ता बहाली की कोशिश से पहले सरकार को विश्वास बहाली की दिशा में कदम उठाने चाहिए। प्रदर्शनों के दौरान गिरफ्तार लोगों की रिहाई इस दिशा में पहला कदम होना चाहिए।

फारुक ने इस बीच चिदंबरम की पेशकश पर कोई भी प्रतिक्रिया देने से इंकार कर दिया।

नेशनल कांफ्रेंस के वरिष्ठ नेता व राज्य के ग्रामीण विकास मंत्री अली मोहम्मद सागर ने कहा कि मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला अलगावादियों व केंद्र सरकार के बीच वार्ता आरंभ करने की कोशिशों में लगे हुए हैं।

उन्होंने कहा, "इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता कि कश्मीर समस्या का हल राजनीतिक तरीके से ही निकालना होगा। हम इस दिशा में प्रयास कर रहे हैं। केंद्रीय गृह मंत्री के बयान का हम स्वागत करते हैं।"

इससे पहले चिदंबरम ने कहा था कि अगले सप्ताह राज्य के एक सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल की प्रधानमंत्री के साथ मुलाकात की संभावना है। साथ ही सरकार वहां के हालात पर चर्चा के लिए संसद में सभी राजनीतिक दलों की जल्द ही एक बैठक बुलाएगी।

चिदंबरम ने कहा कि सरकार 'बंद बातचीत' को दोबारा शुरू करने के लिए प्रतिबद्ध है।

उन्होंने आशा जताई कि नरमपंथी अलगाववादी नेता दोबारा बातचीत में शामिल होंगे। चिदंबरम ने कहा, "यदि गिलानी (सैय्यद अली शाह गिलानी) भी बातचीत में शामिल होते हैं तो मुझे बहुत खुशी होगी।"

चिदंबरम ने कहा, "तात्कालिक काम कानून एवं व्यवस्था की बहाली है.. हमें जम्मू एवं कश्मीर की गलियों में जारी हिंसा को हर हाल में खत्म करना है।"

पिछले आठ दिनों के दौरान सुरक्षा बलों की गोलीबारी से कश्मीर में 31 प्रदर्शनकारी मारे गए हैं। इस तरह 11 जून से शुरू हुई हिंसा में अब तक 48 लोग मारे जा चुके हैं।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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