नेपाल में हस्तक्षेप नहीं कर रहा भारत : शरण

काठमांडू, 5 अगस्त (आईएएनएस)। राजनीतिक पार्टियों से विचार-विमर्श के लिए काठमांडू पहुंचे प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के विशेष दूत श्याम शरण ने माओवादी पार्टी के प्रमुख नेताओं के साथ बैठक करके वार्ता की शुरुआत की है।

माओवादी पार्टी ने भारत से नेपाल में शुक्रवार को होने जा रहे प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार के चुनाव में हस्तक्षेप नहीं करने को कहा था।

पूर्व विदेश सचिव और नेपाल में भारत के राजदूत रहे शरण ने माओवादी पार्टी के प्रमुख और पूर्व प्रधानमंत्री पुष्प कमल दहाल प्रचंड से करीब एक घंटे तक बातचीत की। इस बातचीत में प्रचंड के तीन साथी नेता बाबूराम भट्टराई, नारायण काजी श्रेष्ठ और मोहन वैद्य भी उपस्थित थे।

प्रचंड के आवास पर गुरुवार को हुई इस बैठक में नेपाल में भारत के मौजूदा राजदूत राकेश सूद के अलावा माओवादी नेता राम बहादुर थापा और बहादुर महारा भी उपस्थित थे।

शरण ने पत्रकारों से कहा कि वार्ता काफी उत्साहजनक रही। इसके बाद वह कार्यकारी प्रधानमंत्री माधव कुमार नेपाल और नेपाली कांग्रेस के अध्यक्ष सुशील कोईराला से भी मुलाकात करेंगे।

शरण ने अपने इस अघोषित काठमांडू दौरे में तराई की चार स्थानीय पार्टियों के नेताओं से भी बातचीत की।

माओवादी पार्टी के उपाध्यक्ष और सांसद श्रेष्ठ ने पत्रकारों से कहा कि शरण ने शांति प्रक्रिया और मई 2011 तक नया संविधान बनाने के लिए अपनी चिंता व्यक्त की है और इसके लिए मदद पर विचार करने की बात कही है।

भारतीय दूत ने स्पष्ट किया कि उनका यह दौरा शुक्रवार को होने वाले चुनाव के लिए पार्टियों पर दबाव डालने और उन्हें प्रभावित करने के लिए नहीं है। श्रेष्ठ ने कहा कि भारत नेपाल से अपने संबंध मजबूत करना चाहता है और उसने माओवादियों के सामने अपनी चिंताएं स्पष्ट रूप से प्रकट की हैं।

इसके अलावा शरण ने वर्ष 2006 में माओवादी विद्रोह खत्म करके शांति प्रक्रिया में भाग लेने वाले माओवादी पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) के 19,000 पूर्व लड़ाकों के भविष्य को लेकर भी चिंता प्रकट की।

सत्ता पक्ष के साथ माओवादी भी पीएलए के लड़ाकों के पुनर्वास या सेना में शामिल किए जाने के काम को आगे नहीं बढ़ा पा रहे हैं।

लड़ाकों के पुनर्वास का यह मुद्दा प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार के चुनाव के पिछले तीन दौर में गतिरोध का प्रमुख केंद्र बना रहा है।

माओवादियों ने गुरुवार को प्रचंड की उम्मीदवारी वापस लेने से इंकार कर दिया। पिछले दौर के चुनाव में उन्हें सामान्य बहुमत भी नहीं मिल सका था। प्रचंड को इस बार तराई की पार्टियों का समर्थन मिलने की उम्मीद है।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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