साफ पानी की उपलब्धता मानव अधिकार : संयुक्त राष्ट्र
समाचार एजेंसी 'डीपीए' के अनुसार, 192 देशों की प्रतिनिधित्व वाली संस्था ने बुधवार को इसे मंजूरी दे दी। बोलीविया ने 33 अन्य राष्ट्रों के सहयोग से इस प्रस्ताव को रखा था। इसके पक्ष में 121 मत पड़े जबकि 41 देशों ने मतदान में हिस्सा नहीं लिया।
प्रस्ताव में शौचालय की व्यवस्था को भी शामिल किया गया है। दुनिया की करीब 40 फीसदी आबादी के पास उचित शौचालय व्यवस्था नहीं है।
इस निर्णय की कोई कानूनी स्थिति नहीं है और मानवाधिकार के सार्वभौमिक घोषणा का हिस्सा भी नहीं है। लेकिन सभी के लिए साफ पानी और शौचालय व्यवस्था की उपलब्धता बढ़ाने के लिए राष्ट्रों से धन, प्रौद्योगिकी और अन्य संसाधन मुहैया कराने की पेशकश की गई है।
अमेरिका ने इस प्रस्ताव पर मतदान से बहिष्कार किया और कहा कि यह प्रस्ताव जल्दबाजी में उठाया गया कदम है।
विकासशील देशों ने इस प्रस्ताव को करीब-करीब सर्वसम्मति से समर्थन दिया। जर्मनी ने भी इसके पक्ष में मत दिया।
जर्मनी के राजदूत पीटर विट्टिग ने कहा, "दुनिया भर में 88.4 करोड़ से ज्यादा लोगों को पीने के लिए साफ पानी नसीब नहीं है जबकि 2.6 अरब से ज्यादा लोगों के पास उपयुक्त शौचालय की व्यवस्था नहीं है।"
उन्होंने कहा, "दूषित पानी और शौचालय की उचित व्यवस्था न होने की वजह से फैलने वाली बीमारियों के कारण हर साल 20 लाख से ज्यादा लोगों की मौत हो जाती है।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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