अमन के लिए रमजान की राह देखते कश्मीरी

एफ. अहमद

श्रीनगर, 26 जुलाई (आईएएनएस)। पिछले दो महीनों से हिंसा, पथराव और कर्फ्यू से दो-चार हो रहे कश्मीरियों को बेसब्री से पवित्र महीने रमजान का इंतजार है। उन्हें उम्मीद है कि यह पवित्र महीना उनकी जिंदगी को अमन की रोशनी जगमगाएगा।

लगभग दो महीने से कश्मीर घाटी में तनाव है। बीते 11 जून को आंसू गैस के गोले से एक युवक के मारे जाने के बाद घाटी में हिंसा का दौरा शुरू हुआ था। इसके बाद से जारी हिंसा में अब तक कई लोग मारे जा चुके हैं।

घाटी के लोगों को अलगाववादियों से ओर से बंद के आह्वान और जुलूस निकालने से हर बार खासी दिक्कत हुई है। हिंसा और बंद की वजह से इन दिनों शैक्षणिक संस्थान, सार्वजनिक यातायात, बैंक, डाकघर, बाजार और अन्य कारोबारी प्रतिष्ठान अक्सर बंद रहते हैं।

स्कूलों और कॉलेजों में छात्रों की उपस्थिति न होने की वजह से भी पढ़ाई प्रभावित हुई है। कश्मीर विश्वविद्यालय के एक शिक्षक ने आईएएनएस को बताया, "मैं बंद के दौरान विश्वविद्यालय आता रहा हूं। परंतु कक्षाओं में छात्र नहीं होते।"

दूसरी ओर अभिभावकों का कहना है कि बंद और हिंसा के बीच वे अपने बच्चों को स्कूल-कॉलेज भेजने का खतरा मोल नहीं ले सकते। श्रीनगर के महाराजगंज इलाके के निवासी 46 वर्षीय शफीक अहमद कहते हैं, "मेरे बेटे को नुकसान पहुंचे, इससे अच्छा है कि वह स्कूल से गैरहाजिर रहे।"

घाटी के बिगड़े माहौल का असर आम लोगों की रोजी-रोटी पर भी पड़ा है। फल विक्रेता मुहम्मद सुल्तान कहते हैं, "मुझे अपना परिवार को चलाने के लिए एक जून रोटी कमानी जरूरी है। काफी दिनों से मेरे पास कोई काम नहीं है।"

तनावपूर्ण माहौल के बीच यहां के लोगों को उम्मीद है कि रमजान में घाटी में शांति होगी और उनकी जिंदगी बेहतर बनेगी। पुलवामा जिले के निवासी अब्दुल सलाम ने कहा, "रमजान का पाक महीना हमारी जिंदगी में जरूर अमन लाएगा। इस महीने में सभी रोजे और नमाज में मशगूल होंगे।"

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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