आईएसआई को भारत, अफगानिस्तानमें आतंकवाद फैलाने की खुली छूट
वाशिंगटन, 26 जुलाई (आईएएनएस)। जासूसी इतिहास के अब तक के सबसे बड़े खुलासे में कहा गया है कि पाकिस्तान की खुफिया संस्था इंटर सर्विसिज इंटेलीजेंस (आईएसआई) को वर्षो से अफगानिस्तान और भारत में आतंकवाद को बढ़ावा देने की खुली छूट मिली हुई है।
वेबसाइट 'विकिलीक्स डॉट ओआरजी' के संस्थापक जूलियन एसेंज के अनुसार 'द वॉर लाग्स' कहे जाने वाले अमेरिकी सेना के 92,201 गुप्त दस्तावेजों में अफगानिस्तान के युद्ध के छह वर्षो का पूरा ब्योरा मौजूद है। इसमें मारे गए लोगों की संख्या और खतरों के बारे में रिपोर्टे भी शामिल हैं।
रविवार को दस्तावेजों को ऑनलाइन जारी करने से कई हफ्ते पहले ही इनको 'न्यूयार्क टाइम्स', लंदन के 'द गार्जियन' और जर्मन साप्ताहिक 'डीर स्पाइगेल' को देखने, समीक्षा करने और प्रमाणिकता जांचने का मौका दिया गया था।
टाइम्स के अनुसार पाकिस्तानी सेना शत्रु और मित्र दोनों रूप में काम कर रही है और इसकी खुफिया एजेंसी आईएसआई अलकायदा के साथ हमलों की साजिश रचने का काम करती है। अमेरिकी अधिकारियों को लंबे समय से उसके दोहरे खेल में शामिल होने का संदेह था।
पाकिस्तान ने अपनी खुफिया एजेंसी के अधिकारियों को अमेरिका से लड़ रहे तालिबान के आतंकवादी सरगनाओं से सीधे मिलने और अफगान नेताओं की हत्या के षड्यंत्र रचने की अनुमति दी।
अखबार के अनुसार बड़े हमलों में आईएसआई के सीधे तौर पर शामिल होने के बारे में अमेरिकी अधिकारियों के पास शायद ही कोई सबूत होता था लेकिन जुलाई 2008 में सीआईए के उप निदेशक स्टीफन आर.केपेस ने काबुल में भारतीय दूतावास पर आत्मघाती हमले में आईएसआई के शामिल होने के सबूत पाकिस्तानी अधिकारियों के सामने रखे।
दस्तावेजों में कहा गया कि वर्ष 1987 से 1989 तक आईएसआई के प्रमुख रहे हामिद गुल ने बाद में भी अपने तंत्र को सक्रिय रखा। उसने जलालुद्दीन हक्कानी और गुलबुद्दीन हिकमतयार जैसे लोगों को सक्रिय किया। इनके हजारों लड़ाके अफगानिस्तान में हिंसा बढ़ाने के लिए जिम्मेदार हैं।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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