'राष्ट्रमंडल खेलों की तैयारियों में देरी पर चुप्पी तोड़ें प्रधानमंत्री'
गोयल ने कहा कि इतने बड़े राष्ट्रीय महत्व के कार्यक्रम की सफलता के लिए उन्हें अपनी ओर से ठोस प्रयास करने चाहिए। उन्होंने प्रधानमंत्री को सलाह दी है कि वह शीघ्र सर्वदलीय बैठक बुलाएं और सबको विश्वास में लेकर बताएं कि राष्ट्रमंडल खेलों की तैयारी बचे हुए 70 दिन के भीतर पूरी कराने की उनकी क्या योजना है?
उन्होंने कहा कि 19वें राष्ट्रमंडल खेल आज देश के लिए प्रतिष्ठा का विषय बने हुए हैं। इस खेल के आयोजन की जिम्मेदारी वर्ष 2003 में एनडीए सरकार में प्रधानमंत्री रहे अटल बिहारी वाजपेयी के कार्यकाल में दिल्ली को मिली थी। स्वयं खेल मंत्री एम.एस. गिल ने संसद में बयान दिया कि आयोजन की जिम्मेदारी मिलने के बाद तीन-चार वर्ष तक ढांचागत निर्माण की तरफ कोई ध्यान नहीं दिया गया।
गोयल ने कहा कि राष्ट्रमंडल खेल फेडरेशन के अध्यक्ष माइक फेनेल ने भी प्रधानमंत्री का ध्यान इस ओर दिलाया और उसके बाद केंद्र सरकार ने उच्चस्तरीय समिति भी गठित की। फिर भी आयोजन समिति, दिल्ली एवं केंद्र सरकार नहीं जागी, जिसका परिणाम है कि देश के लोगों में चिंता है कि खेल सही समय पर सही तरीके से आयोजित हो पाएंगे या नहीं।
उन्होंने कहा कि इस मसले पर अन्य राजनीतिक दलों को न तो विश्वास में लिया गया और न ही उनसे कोई सहयोग मांगा गया, जबकि जिस समय खेल की जिम्मेदारी मिली थी, उस समय तत्कालीन प्रधानमंत्री वाजपेयी के साथ प्रतिपक्ष की नेता सोनिया गांधी का पत्र भी राष्ट्रमंडल खेल फेडरेशन के सामने प्रस्तुत किया गया था कि देश सबके सहयोग से इन खेलों को संपन्न कराएगा। इसलिए सर्वदलीय बैठक बुलाकर प्रधानमंत्री बताएं कि खेलों की कितनी तैयारी हुई और इस पर अब तक कुल कितना खर्च हुआ है?
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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