बिहार : प्रमुख नदियों के जलस्तर में कमी
अररिया, किशनगंज, मधेपुरा और पूर्णिया के कई क्षेत्रों में बाढ़ की स्थिति उत्पन्न हो गई है। कटाव के कारण कई गांवों के अस्तित्व पर सवाल खड़े हो गए हैं।
किशनगंज जिले के पांच प्रखंडों की दर्जनों पंचायतों में बाढ़ के कारण लोग पलायन कर गए हैं। जूट की फसल पूरी तरह से बर्बाद हो गई है। पोठैया और किशनगंज प्रखंड की स्थिति बदतर बनी हुई है। ठाकुरगंज और कोचाधामन प्रखंड में पिछले दो दिनों के भीतर बाढ़ के पानी में डूबने से चार बच्चों की मौत हो गई है।
किशनगंज के जिलाधिकारी संदीप कुमार कुट्टी ने बताया कि कुछ क्षेत्रों में बाढ़ का पानी घट रहा है और बाढ़ प्रभावित इलाकोंमें राहत और बचाव कार्य जारी है।
मधेपुरा जिले के कई गांव बाढ़ की चपेट में हैं। मुरौता गांव पूरी तरह पानी में डूब गया है। वहां के लोग ऊंचाई वाले स्थानों पर शरण लिए हुए हैं। मुरौता और फुलौत गांव को कोसी नदी ने चारों तरफ से घेर लिया है।
मधेपुरा में कटाव के कारण कई गांवों के अस्तित्व पर संकट खड़ा हो गया है। मधेपुरा के जिलाधिकारी वीरेन्द्र प्रसाद यादव बताते हैं कि कटाव वाले क्षेत्र में अभियंता बचाव कार्य में दिन-रात लगे हुए हैं।
पूर्णिया प्रमंडल के अररिया सहित चार जिलों के 19 प्रखंड बाढ़ की चपेट में हैं। अररिया के नरपतगंज प्रखंड में दरगाही नहर का पश्चिमी तटबंध टूट जाने से बाढ़ का पानी कई क्षेत्रों में घुस गया है। कटिहार के कदवा, प्राणपुर, आजमनगर सहित एक दर्जन से अधिक ग्राम पंचायतों में बाढ़ का पानी घुस गया है।
शनिवार को नदियों के जलस्तर में कमी देखी जा रही है। इस कारण संभावना व्यक्त की जा रही है कि बाढ़ की स्थिति में कुछ सुधार होगा। वीरपुर स्थित बैराज से कोसी के जलस्तर में लगातर कमी हो रही है।
बीरपुर बैराज के मुख्य अभियंता सी़ एस़ पासवान ने शनिवार को बताया कि सुबह छह बजे जहां बैराज से 1,64,000 क्यूसेक पानी का प्रवाह था वहीं 12 बजे यह घटकर 1,48,000 क्यूसेक पर पहुंच गया।
पटना स्थित बाढ़ नियंत्रण कक्ष के मुताबिक राज्य की प्रमुख नदियों में भी जलस्तर घट रहा है। बाढ़ नियंत्रण कक्ष में तैनात अभियंता मनोरंजन वर्मा बताते हैं कि बागमती नदी बेनीबाद में केवल खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं, जबकि सभी नदियां खतरे के नीचे हैं।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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