झारखण्ड में सफाईकर्मी बना पुलिस अधिकारी
रोशन गुड़िया सिमडेगा जिले के एक प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में एक सफाईकर्मी हैं। उन्होंने अपने चौथे प्रयास में झारखण्ड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) परीक्षा में यह सफलता हासिल की।
वह खूंटी जिले के करमाटांड गांव के निवासी हैं। उनके पिता सोमा गुड़िया सेना में कार्यरत थे। अब वह सेवानिवृत्त हो चुके हैं।
रोशन बचपन से ही एक पुलिस अधिकारी बनना चाहते थे। उन्होंने कड़ी मेहनत की और शुरुआती असफलताओं के बाद निराशा को खुद पर हावी नहीं होने दिया। उन्हें दो साल पहले एक सफाईकर्मी की नौकरी मिल गई थी लेकिन उन्होंने अपनी पढ़ाई या उम्मीद नहीं छोड़ी।
आज रोशन खुश हैं। वह कहते हैं, "मैंने जो सपना देखा था उसे पूरा कर लिया है।"
उनकी मां सुनीला को भी अपने बेटे की उपलब्धि पर खुशी है। जब उन्होंने अपने बेटे के एक पुलिस अधिकारी के तौर पर चयनित होने की खबर सुनी तो उनकी आंखों से आंसू छलक पड़े।
रोशन की तरह ही झारखण्ड में ऐसे कई अन्य गरीब छात्र हैं जो सफलता हासिल कर पुलिस उपाधीक्षक दर्जे के राज्य स्तरीय प्रशासनिक अधिकारी बने हैं।
एक रिक्शा चालक के बेटे मुकेश महुआ को एक उप जिलाधीश के रूप में सफलता मिली। मुकेश रांची के बाहरी क्षेत्र के बुंडु प्रखंड के निवासी हैं। वह इससे पहले शादियों में ड्रम बजाया करते थे। उनके पिता निमाई महुआ एक रिक्शा चालक हैं।
इसी तरह एक चालक के बेटे कृष्ण कुमार को उप जिलाधीश के बतौर सफलता मिली। उनके पिता भुनेश्वर प्रजापति हजारीबाग में चालक हैं।
जेपीएससी के परीक्षा परिणाम रविवार रात घोषित हुए। कुल 175 उम्मीदवारों ने विभिन्न पदों पर सफलता हासिल की है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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