अलगाववादियों के बंद से घाटी में जनजीवन बाधित
कई दिन के कर्फ्यू और बंद के बाद एक दिन पहले ही यहां जनजीवन सामान्य हुआ था। उत्तरी कश्मीर के बारामूला में शनिवार को पथराव कर रही भीड़ का सुरक्षा बलों द्वारा कथित रूप से का पीछा किये जाने के दौरान एक छात्र की नदी में डूबने से मौत हो जाने से यहां तनाव फैल गया।
हुर्रियत के कट्टरपंथी गुट के नेता सैय्यद अली गिलानी ने सुरक्षा बलों द्वारा कथित मानवाधिकार हनन के विरोध में घाटी में रविवार को बंद का आह्वान किया है। कट्टरपंथी गुट ने इस बंद को 'कश्मीर छोड़ो' अभियान का हिस्सा बताया है।
पुलिस ने कहा, "श्रीनगर के पुराने शहर और मैसुमा, बटमालू और हमहमा इलाकों में हिंसा रोकने के लिए प्रतिबंध लगाए गए हैं।"
पुलिस और केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) के जवान सुबह से ही इन इलाकों में प्रतिबंधों को लागू करा रहे हैं।
पुराने शहर, मैसुमा और बटमालू में यातायात पूरी तरह रोका गया है किसी को भी सड़कों पर चलने की इजाजत नहीं दी गई है।
उत्तर कश्मीर के सोपोर इलाके में भी पुलिस और सीआरपीएफ ने प्रतिबंध लागू किए हैं।
12 दिनों तक चले कर्फ्यू और बंद के दौर के बाद शनिवार को कश्मीर घाटी में स्थिति सामान्य हुई थी।
दोबारा बंद और अशांति की संभावना के चलते लोग बड़ी संख्या में जरूरी सामान खरीदने के लिए बाजारों में पहुंचे।
बारामूला में शनिवार को तनाव की शुरूआत उस समय हुई जब सातवीं कक्षा के छात्र फैजान अहमद बुहरू की सुरक्षा बलों के द्वारा कथित रूप से पीछा किये जाने के कारण नदी में डूबने से मौत हो गई थी। इस छात्र की लाश हालांकि अभी तक नहीं मिली है।
कहा जा रहा है कि सुरक्षा बलों के जवान शनिवार को बारामूला कस्बे में आजादगंज ब्रिज के करीब पथराव कर रही एक भीड़ का पीछा कर रहे थे तभी इस छात्र की नदी में डूबने से मौत हो गई।
जिलाधिकारी (बारामूला) बशीर अहमद भट ने पत्रकारों से कहा कि प्रशासन की पहली प्राथमिकता शव की तलाश करना है।
भट ने कहा, "लाश मिलने के बाद ही छात्र के डूबने के कारणों का पता चल सकेगा।"
पिछले 11 जून के बाद से शुरू हुए हिंसक प्रदर्शनों में घाटी में अब तक 14 नागरिकों की मौत हुई है। राज्य सरकार ने नागरिकों की मौतों के कारणों की स्वतंत्र जांच कराने का निर्णय लिया है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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