खरलांजी नरसंहार में 6 दोषियों को मौत की जगह उम्रकैद
नागपुर। मुंबई उच्च न्यायालय की नागपुर पीठ ने बुधवार को खरलांजी के दलित परिवार नरसंहार कांड के वर्ष 2006 के मामले में मौत की सजा पाए छह दोषियों की सजा घटाकर आजीवन कारावास में बदल दिया। न्यायमूर्ति ए.पी.लावन्डे और न्यायमूर्ति आर.सी.चौहान की खंडपीठ ने बहुप्रतीक्षित फैसला सुनाते हुए निचली अदालत के फैसले को चुनौती देने वाली केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) की याचिका खारिज कर दी।
एक निचली अदालत ने वर्ष 2008 में आठ आरोपियों में से दो को आजीवन करावास और छह को मौत की सजा सुनाई थी। अब सभी दोषियों को आजीवन कारावास की सजा दी गई है। निचली अदालत ने शत्रुघ्न धांडे, विश्वनाथ धांडे, रामू धांडे, सर्कु बिंजेवार, जगदीश मांडेलकर और प्रभाकर मांडेलकर को मौत की सजा दी थी जबकि शिशुपाल धांडे और गोपाल बिंजेवार को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी। तीन अरोपियों को बरी कर दिया गया था।













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