मोबाइल कंपनियों के राजस्व वृद्धि की गति हुई धीमी

वर्ष 2009-10 में दूरसंचार क्षेत्र की आय 1,55,683 करोड़ रुपये से बढ़कर 1,59,510 करोड़ रुपये रही। दूरसंचार उद्योग का फीका प्रदर्शन उद्योग के प्रमुख जर्नल वॉयस एंड डेटा के ताजा सर्वेक्षण में सामने आया है। दूरसंचार सेवाओं से होने वाली आमदनी में सेलुलर, फिक्स्ड लाइन, नेशनल लॉन्ग डिस्टेंस (आईएलडी), ब्रॉडबैंड, वीसैट और रेडियो ट्रंकिंग कारोबार शामिल है।

दरों में कड़ी प्रतिस्पर्धा के चलते इस उद्योग के सभी क्षेत्रों के प्रदर्शन में काफी कमी आई है और कुल मिला कर इस उद्योग में धीमापन आया है। इसमें सेलुलर सेवाएं भी शामिल हैं, जो पिछले कई सालों से दूरसंचार सेवा उद्योग के विकास में अगुवाई कर रहीं थीं।

'साइबर मीडिया' के मुख्य संपादक प्रशांत रॉय के अनुसार पिछले पांच सालों में यह दूरसंचार सेवाओं की आमदनी में सबसे धीमी बढ़त है। दरों को लेकर लड़ाई अब और लंबी नहीं चल सकती। आगे चलकर इस उद्योग में विलय-अधिग्रहण हो सकता है, जिससे दरों की लड़ाई कुछ थमेगी। 3जी सेवाएं शुरू होने और ब्रॉडबैंड सेवाओं (वायरलेस ब्रॉडबैंड सहित) के विस्तार से इस क्षेत्र की आमदनी सुधेरगी, लेकिन इसका असर मौजूदा वित्त वर्ष के बदले 2011-12 में ज्यादा दिखेगा।

मोबाइल फोन ग्राहकों की संख्या में लगभग 50 प्रतिशत की वृद्धि के बावजूद उनसे होने वाली आमदनी केवल 3.6 प्रतिशत बढ़ी है। यह आमदनी 93,522 करोड़ रुपये से बढ़कर 96,860 करोड़ रुपये हो गई। नए ऑपरेटरों की ओर से दरों मे कमी और एक पैसा प्रति सेकेंड की कॉल दर लागू किए जाने के चलते प्रमुख ऑपरेटरों को भी दरों में कटौती करनी पड़ी।

सेलुलर सेवाओं का बाजार दो साल पहले ही 36.4 प्रतिशत की दर से बढ़ा था और इसने भारतीय दूरसंचार क्रांति को दिशा दी थी। इसके ही कारण आज हर दूसरे भारतीय के पास मोबाइल फोन है।

देश के तीन प्रमुख ऑपरेटरों भारती, रिलायंस और वोडाफोन में से प्रत्येक के ग्राहकों की संख्या 10 करोड़ से ऊपर है। वहीं पूरे देश में फिक्स्ड टेलीफोन कनेक्शनों की संख्या अब भी 3.70 करोड़ पर अटकी है।

वॉयस एंड डेटा की रिपोर्ट में अनुमान जताया गया है कि 14 सक्रिय मोबाइल ऑपरेटरों के होने से प्रतिस्पर्धा और ज्यादा तीखी हो सकती है क्योंकि ये सभी ऑपरेटर आमदनी में कमी रोकने के लिए हरसंभव कारोबारी तरीके अपनाएंगे। देश के अधिकांश प्रमुख शहरों ने लगभग 100 प्रतिशत मोबाइल घनत्व हासिल कर लिया है लेकिन इनमें से करीब 20 प्रतिशत मोबाइल सक्रिय नहीं हैं।

साइबर मीडिया समूह के जर्नल के मुताबिक 2009-10 में लगभग 3/5 नए ग्राहक ग्रामीण क्षेत्रों से आए हैं। अनुमान है कि भविष्य में अधिकांश नए ग्राहक ग्रामीण क्षेत्रों से आएंगे।

फिक्स्ड लाइन कारोबार के लिए 2009-10 एक बार फिर आमदनी घटने का साल रहा। इसकी आमदनी 23.3 प्रतिशत घट कर 18,900 करोड़ रह गई। फिक्स्ड लाइन कारोबार की तीन शीर्ष कंपनियों बीएसएनएल, एमटीएमएनएल और भारती एयरटेल की आमदनी जहां घटी, वहीं दूसरे ऑपरेटरों जैसे रिलायंस कम्युनिकेशंस, टीटीएसएल और टीटीएमएल की आमदनी बढ़ी है।

देश की शीर्ष 10 टेलीकॉम कंपनियों की आमदनी में वर्ष 2009-10 में वृद्धि की दर निम्नलिखित है :

1.भारती एयरटेल (5.0 प्रतिशत)

2.बीएसएनएल (-14.0 प्रतिशत)

3.वोडाफोन (13.7 प्रतिशत)

4.रिलायंस कम्युनिकेशंस (-3.5 प्रतिशत)

5. आइडिया सेलुलर (12.5 प्रतिशत)

6.टाटा कम्युनिकेशंस (10.4 प्रतिशत)

7.टाटा टेलीसर्विसिज (2.4 प्रतिशत)

8.एयरसेल (37.2 प्रतिशत)

9.एमटीएनएल (-18.7 प्रतिशत)

10. टीटीएमएल (19.2 प्रतिशत)

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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